गुरूवार, 1 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ओडिशा में बनेगी पूर्वी भारत की 'सिलिकॉन वैली', 23,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले

ओडिशा सरकार ने राज्य को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि कटक जिले के नारज में पूर्वी भारत की…

ओडिशा में बनेगी पूर्वी भारत की 'सिलिकॉन वैली', 23,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले
(फोटो: IANS)

ओडिशा सरकार ने राज्य को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि कटक जिले के नारज में पूर्वी भारत की पहली 'सिलिकॉन वैली' विकसित की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के लिए सरकार को लगभग 23,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं।

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यह घोषणा मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया 2026' सेमिनार के दौरान की। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कटक के पास नारज में 870 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है, जहाँ प्रमुख सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी कंपनियाँ अपनी इकाइयाँ स्थापित करेंगी। इस निवेश से राज्य में 6,100 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

रणनीतिक स्थान और बुनियादी ढाँचा

आधिकारिक बयान के मुताबिक, नारज को इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण चुना गया है। यह क्षेत्र कटक-भुवनेश्वर शहरी गलियारे के करीब है, जिससे बेहतरीन कनेक्टिविटी मिलती है। इसके अलावा, यहाँ से पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाहों और राष्ट्रीय राजमार्गों तक आसान पहुँच है, जो लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला के लिए इसे एक आदर्श केंद्र बनाता है। महानदी नदी के पास होने के कारण सेमीकंडक्टर इकाइयों के लिए आवश्यक पानी की भारी मात्रा भी आसानी से उपलब्ध होगी।

निवेश और वैश्विक भागीदारी

सेमीकॉन इंडिया 2026 सम्मेलन ओडिशा के लिए काफी सफल रहा। यहाँ राज्य को सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री ने जापान, स्वीडन और ताइवान सहित कई वैश्विक और घरेलू कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं।

इन बैठकों के दौरान, क्वाडक्वांटम के साथ एक सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करने के लिए आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह संयंत्र एसआईसी सबस्ट्रेट वेफर्स का उत्पादन करेगा। सम्मेलन में लगे ओडिशा पवेलियन ने आरआईआर पावर, एसआईसीएसईएम जैसी कंपनियों और एनआईटी राउरकेला जैसे शैक्षणिक संस्थानों की परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया, जो 'मेड इन इंडिया' चिप्स डिजाइन करने पर काम कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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