RBI की अगली बैठक में बढ़ सकती है आपकी EMI, महंगाई और बैंकिंग लिक्विडिटी पर HSBC की रिपोर्ट
अगर आप लोन की EMI चुका रहे हैं, तो आने वाले समय में आपकी जेब पर बोझ थोड़ा और बढ़ सकता है। HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी अगली…
अगर आप लोन की EMI चुका रहे हैं, तो आने वाले समय में आपकी जेब पर बोझ थोड़ा और बढ़ सकता है। HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है। इस वृद्धि के बाद प्रमुख ब्याज दर 5.5% पर पहुँच जाएगी।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम बढ़ती महंगाई को काबू में रखने के प्रयासों का हिस्सा हो सकता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि सितंबर में महंगाई दर बढ़कर लगभग 5.5% हो सकती है, जो अगस्त में 4.8% थी। साथ ही, अगले 12 महीनों के दौरान महंगाई दर औसतन 5% से ऊपर बने रहने की आशंका जताई गई है।
बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी हटाने की तैयारी
रिपोर्ट में बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी (लिक्विडिटी) पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अनुसार, सिस्टम से अगले कुछ महीनों में 6 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त तरलता को हटाने की ज़रूरत है। इस कमी को धीरे-धीरे पूरा किया जाएगा, जब तक कि नकद आरक्षित अनुपात (CRR) बढ़ाने जैसे कड़े उपाय नहीं अपनाए जाते।
इस 6 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नकदी में से करीब 2 लाख करोड़ रुपए की ज़रूरत को सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी से पूरा किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाकी की रकम को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) सेल्स, विदेशी मुद्रा की स्पॉट बिक्री और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे मौजूदा तरीकों से प्रबंधित किया जाएगा।
बाहरी चिंताएँ और अर्थव्यवस्था की मजबूती
रिपोर्ट में कुछ बाहरी हालात को चिंताजनक बताया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना एक बड़ी चुनौती है। इसके चलते 2027 के लिए तेल की कीमत का अनुमान 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है। तेल की बढ़ती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती आम तौर पर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह के लिए अच्छी नहीं मानी जातीं।
हालांकि, इन चिंताओं के बीच रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भी जोर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर, इसमें बताया गया है कि यूके-भारत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने के एक महीने बाद ही ब्रिटेन को होने वाले निर्यात में महीने-दर-महीने 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इनपुट: IANS



