शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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NSE की चेतावनी: AI से बढ़ रहे साइबर हमले, एक ब्रोकर की चूक पूरे बाज़ार के लिए खतरा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर हमलों के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के प्रबंध निदेशक और…

NSE की चेतावनी: AI से बढ़ रहे साइबर हमले, एक ब्रोकर की चूक पूरे बाज़ार के लिए खतरा
(फोटो: IANS)

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर हमलों के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने स्टॉकब्रोकरों से अपनी साइबर सुरक्षा को तत्काल मजबूत करने का आग्रह किया है, क्योंकि किसी एक सदस्य की सुरक्षा में सेंध भी पूरे पूंजी बाजार की विश्वसनीयता को खतरे में डाल सकती है।

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मुंबई में शनिवार को आयोजित एएनएमआई इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन 2026 में बोलते हुए, चौहान ने जोर दिया कि हर ब्रोकर और बाजार सदस्य को साइबर सुरक्षा को अपने मुख्य कार्यों का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि एक भी कमजोर कड़ी पूरे ट्रेडिंग सिस्टम की अखंडता और भरोसे को प्रभावित कर सकती है।

साइबर सुरक्षा की व्यापक समीक्षा

आशीष कुमार चौहान ने बताया कि NSE अपने पूरे नेटवर्क की व्यापक समीक्षा कर रहा है ताकि संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान की जा सके। उन्होंने आगाह किया कि AI आधारित साइबर हमलों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निपटने के लिए सभी बाजार भागीदारों को पहले से कहीं ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। हाल के महीनों में साइबर सुरक्षा की चिंताएं बढ़ी हैं, जैसे इसी महीने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में हुए डेटा ब्रीच में 3,897 ग्राहकों की जानकारी डार्क वेब पर पाई गई थी। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने भी ग्राहकों को AI-आधारित धोखाधड़ी, वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक को लेकर चेतावनी जारी की थी।

विशेष टास्क फोर्स और भविष्य की चुनौतियाँ

इस चुनौती से निपटने के लिए चौहान ने एएनएमआई (ANMI) को एक विशेष टास्क फोर्स बनाने का सुझाव दिया। यह टास्क फोर्स संभावित साइबर खतरों की पहचान करेगी, संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करेगी और बाजार सहभागियों को जोखिमों से निपटने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन ब्रोकरों के पास पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है, उन्हें या तो अपनी आंतरिक क्षमता विकसित करनी चाहिए या बाहरी विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।

भविष्य की एक और बड़ी चुनौती का जिक्र करते हुए उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग का उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह तकनीक मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा प्रणालियों को अप्रभावी बना सकती है। इसलिए, बाजार को न केवल मौजूदा खतरों, बल्कि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा। चौहान ने कहा कि NSE कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए ब्रोकरों का समर्थन करने को तैयार है।

इनपुट: IANS

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