असम: अल्पसंख्यक इलाकों में संगठन विस्तार पर BJP का जोर, मुख्यमंत्री बोले- विचारधारा से समझौता नहीं
असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन चुनावी लाभ के लिए वह अपनी मूल विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी…
असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन चुनावी लाभ के लिए वह अपनी मूल विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी बाल विवाह और बहुविवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर अपने कड़े रुख को बनाए रखेगी।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री सरमा ने मंगलवार को गुवाहाटी में हुई भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में यह बात कही। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाताओं को लुभाने या अपनी चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए पार्टी अपने सिद्धांतों को कमजोर नहीं करेगी। उनका संदेश साफ था कि संगठन का विस्तार विचारधारा की कीमत पर नहीं होगा।
बढ़ता वोट प्रतिशत और भाजपा की रणनीति
मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में पार्टी के वोट प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे इन क्षेत्रों में भाजपा की बढ़ती राजनीतिक और संगठनात्मक स्वीकार्यता का संकेत माना। सरमा की यह टिप्पणी पार्टी की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत भाजपा उन निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपना आधार मजबूत कर रही है, जहां पारंपरिक रूप से उसका प्रभाव कम रहा है।
सामाजिक सुधारों पर अटल सरकार
हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य सरकार के सामाजिक सुधार एजेंडे को भी दोहराया। उन्होंने विशेष रूप से बाल विवाह और बहुविवाह जैसी प्रथाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें हर हाल में समाप्त किया जाना चाहिए। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के बावजूद भाजपा इन सामाजिक मुद्दों पर अपने घोषित रुख से पीछे नहीं हटेगी। असम में ये मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहे हैं और भाजपा सरकार इन्हें समाप्त करने के लिए उठाए गए कदमों को अपनी प्रमुख उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है।
इनपुट: IANS



