गुजरात और महाराष्ट्र की घटनाओं पर मानवाधिकार आयोग सख्त, संबंधित सरकारों को नोटिस जारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दो अलग-अलग राज्यों में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित सरकारों से रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दो अलग-अलग राज्यों में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित सरकारों से रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक मामला गुजरात में एक महिला के साथ क्रूरता से जुड़ा है, जबकि दूसरा महाराष्ट्र में बोरवेल का पानी जहरीला होने से संबंधित है। आयोग ने दोनों घटनाओं को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
गुजरात: महिला के साथ अमानवीय व्यवहार
गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले से एक विवाहित महिला के साथ उसके पति और ससुराल वालों द्वारा की गई मारपीट और अमानवीय व्यवहार की मीडिया रिपोर्ट पर आयोग ने संज्ञान लिया है। आरोप है कि महिला जिस पुरुष के साथ रह रही थी, उसके पति और परिवार के लोग दोनों को 'शुद्धिकरण अनुष्ठान' के बहाने वापस ले आए।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला को डंडों और लातों से पीटा गया और एक पेड़ से बांध दिया गया। यह भी आरोप है कि हमलावरों ने महिला के साथ मौजूद पुरुष को ही उसके साथ बलात्कार करने के लिए मजबूर किया। इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया। एनएचआरसी ने सुरेंद्रनगर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेजकर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पीड़िता की स्वास्थ्य स्थिति और उसे दिए गए मुआवजे का विवरण भी शामिल हो।
महाराष्ट्र: जहरीले पानी का संकट
एक अन्य मामले में, एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के दत्ता नगर इलाके में बोरवेल का पानी दूषित होने की खबरों पर स्वतः संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है कि अंबाद औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित कारखानों से रसायनों के रिसाव के कारण पानी जहरीला हो गया है। 7 अक्टूबर की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, निवासी पिछले दो महीनों से यह दूषित पानी इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
इस स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों ने इलाके की महिलाओं को फिलहाल गर्भवती न होने की सलाह दी है और बच्चों को स्कूल न जाने के लिए कहा गया है। स्थानीय निवासियों को पीने के पानी पर हर महीने लगभग 5,000 रुपये और इलाज पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है।
इनपुट: IANS



