न्यूज़ीलैंड चुनाव: महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की चिंता के बीच त्रिशंकु संसद के आसार, मुकाबला बेहद कड़ा
न्यूज़ीलैंड में शनिवार को होने वाले आम चुनाव से पहले मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है, जहाँ मतदाताओं के लिए जीवन-यापन की लागत, स्वास्थ्य सेवा और ईंधन की बढ़ती कीमतें सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। समाचार…
न्यूज़ीलैंड में शनिवार को होने वाले आम चुनाव से पहले मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है, जहाँ मतदाताओं के लिए जीवन-यापन की लागत, स्वास्थ्य सेवा और ईंधन की बढ़ती कीमतें सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, चुनाव पूर्व सर्वेक्षण एक त्रिशंकु संसद की ओर इशारा कर रहे हैं, जिसमें किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है।
शुक्रवार को जारी 'द पोस्ट/फ्रेशवाटर स्ट्रेटेजी' के नवीनतम सर्वेक्षण में विपक्षी लेबर पार्टी 30.7 प्रतिशत समर्थन के साथ सत्ताधारी नेशनल पार्टी (26.4 प्रतिशत) से मामूली बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, गठबंधन के सहयोगियों को मिलाकर सत्ता पक्ष का पलड़ा थोड़ा भारी नज़र आता है।
गठबंधन का गणित और सीटों का अनुमान
इस पोल के मुताबिक, 120 सीटों वाली संसद में सत्ताधारी गठबंधन बहुमत के आंकड़े से चूक सकता है। नेशनल पार्टी की सहयोगी पार्टियों—एसीटी को 9.8 प्रतिशत और 'न्यूज़ीलैंड फर्स्ट' को 12 प्रतिशत समर्थन मिलता दिख रहा है। इस तरह, इस गठबंधन को कुल 59 सीटें मिलने का अनुमान है, जो सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 61 सीटों से दो कम है।
वहीं, विपक्षी खेमे में लेबर पार्टी के साथ ग्रीन पार्टी को 13 प्रतिशत और माओरी पार्टी को 2 प्रतिशत समर्थन हासिल है। इस गठबंधन को कुल 55 सीटें मिलने की संभावना है। एक अन्य दल 'अपॉर्चुनिटी पार्टी' को 5.1 प्रतिशत समर्थन मिला है, जिसे संभावित 'किंगमेकर' के रूप में देखा जा रहा है।
मतदाताओं के सबसे बड़े मुद्दे
इप्सोस द्वारा 1,008 लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि 64 प्रतिशत मतदाताओं के लिए 'महंगाई' और 'जीवन-यापन की लागत' शीर्ष तीन चिंताओं में शामिल है। इसके बाद 45 प्रतिशत लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को और 31 प्रतिशत ने ईंधन की कीमतों को मुख्य मुद्दा बताया। चिंता की बात यह है कि ईंधन की कीमतों का मुद्दा सातवें स्थान से उछलकर तीसरे पर आ गया है।
मतदान और नतीजे
न्यूज़ीलैंड में 'मिश्रित-सदस्य आनुपातिक प्रणाली' के तहत मतदान होता है, जिसमें अक्सर गठबंधन सरकारों का गठन होता है। चुनाव के दिन, शनिवार को देशभर में 2,300 से अधिक मतदान केंद्र खुलेंगे। चुनाव के आधिकारिक नतीजे 27 नवंबर को घोषित किए जाएँगे। इस बीच, चुनाव आयोग के अनुसार, अग्रिम मतदान (एडवांस वोटिंग) के पहले सात दिनों में ही 9,13,000 से अधिक लोग अपना वोट डाल चुके हैं, जो पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 24 प्रतिशत है।
इनपुट: IANS



