पश्चिम बंगाल में निवेश आकर्षित करने की नई पहल, सरकार ने औद्योगिक नीति में दी कई बड़ी छूट
पश्चिम बंगाल में नए उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति का अनावरण किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस नीति में…
पश्चिम बंगाल में नए उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति का अनावरण किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस नीति में उद्योगपतियों के लिए कई तरह के प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है, जिसमें बिजली शुल्क से लेकर स्टांप ड्यूटी तक में छूट शामिल है।
नीति का एक सबसे आकर्षक पहलू कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में नियोक्ताओं के योगदान पर सरकारी सहायता है। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रोजगार पैदा करने पर विशेष जोर दिया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में, सरकार महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए 10 साल तक नियोक्ता के पूरे EPF योगदान का खर्च उठाएगी। इसी अवधि के लिए पुरुष कर्मचारियों के मामले में यह सहायता 50 प्रतिशत होगी।
प्रमुख प्रोत्साहन और छूट
नई नीति के तहत, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा, दोनों क्षेत्रों में नए निवेश करने वाली इकाइयों को पांच साल तक बिजली शुल्क में पूरी छूट मिलेगी। इसके अलावा, औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी से भी छूट देने का प्रस्ताव है। नई इकाइयां स्थापित करने के लिए किराए की जगह लेने पर भी राज्य सरकार वित्तीय सहायता देगी।
मेगा परियोजनाओं के मामले में, जहाँ प्रति एकड़ 50 नौकरियां पैदा होंगी, सरकार सड़क निर्माण, पानी और बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से सुनिश्चित करने में मदद करेगी। साथ ही, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) फंड से 100 करोड़ रुपये या अधिक के निवेश से बनने वाले शैक्षणिक संस्थानों या अस्पतालों के लिए शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का भी प्रस्ताव है।
MSME और पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
राज्य के औद्योगिक रूप से पिछड़े उप-मंडलों में निवेश करने पर अधिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए, सरकार किफायती ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध कराएगी और नई तकनीक अपनाने में भी मदद करेगी।
पुरानी औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर भी प्रोत्साहन दिया जाएगा, बशर्ते इससे रोजगार का सृजन हो। प्लांट और मशीनरी में निवेश के आधार पर, सामान्य इकाइयों के लिए कुल सहायता सीमा 100%, 'थ्रस्ट सेक्टर' के लिए 110% और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए 120% होगी। यह सहायता उत्पादन शुरू होने के बाद चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।
सरल और समयबद्ध प्रक्रिया
नई नीति में आवेदनों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। सभी आवेदन एक 'सिंगल-विंडो पोर्टल' के जरिए किए जाएंगे। इस पोर्टल पर आवेदन के 30 दिनों के भीतर 'सर्टिफिकेट ऑफ इंटेंट' और उत्पादन शुरू होने के 45 दिनों के भीतर 'सर्टिफिकेट ऑफ एलिजिबिलिटी' जारी करने की समय-सीमा तय की गई है।
इनपुट: IANS



