बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक में 75 साल का सबसे भीषण सूखा: केंद्र के इंतज़ार बिना, किसानों को पहली राहत किस्त देगी राज्य सरकार

कर्नाटक पिछले लगभग 75 वर्षों के सबसे गंभीर सूखे की चपेट में है, जिससे राज्य की लगभग 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। इस अभूतपूर्व संकट को देखते हुए, राज्य सरकार ने केंद्रीय सहायता का इंतजार किए…

कर्नाटक में 75 साल का सबसे भीषण सूखा: केंद्र के इंतज़ार बिना, किसानों को पहली राहत किस्त देगी राज्य सरकार
(फोटो: IANS)

कर्नाटक पिछले लगभग 75 वर्षों के सबसे गंभीर सूखे की चपेट में है, जिससे राज्य की लगभग 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। इस अभूतपूर्व संकट को देखते हुए, राज्य सरकार ने केंद्रीय सहायता का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों से किसानों को तत्काल राहत देने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को इसकी घोषणा की।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार फसल नुकसान झेल रहे किसानों को पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। बल्लारी जिले के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद उपमुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी प्राथमिकता कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे किसानों की मदद करना है। हम यह कहकर नहीं बैठ सकते कि केंद्र ने एक भी रुपया जारी नहीं किया।"

सूखे की भयावह स्थिति

राज्य के राजस्व मंत्री का पदभार संभाल रहे जी. परमेश्वर ने बताया कि संकट केवल बारिश पर निर्भर खेती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिंचित क्षेत्रों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के लगभग 240 तालुकों में से 217 को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 10 से 15 और तालुकों को इस सूची में शामिल किया जा सकता है।

बल्लारी और विजयनगर जैसे इलाकों में हालात विशेष रूप से गंभीर हैं। कई किसानों ने पहले तूर की बुआई की, जो बारिश न होने से खराब हो गई। बाद में कुछ वर्षा होने पर उन्होंने ज्वार जैसी वैकल्पिक फसलें लगाईं, लेकिन वे भी सफल नहीं हो सकीं, जिससे किसान खाली हाथ रह गए हैं।

केंद्र से सहायता की मांग

उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने केंद्र को दो ज्ञापन सौंपकर लगभग 46,000 करोड़ रुपये के कुल नुकसान का अनुमान जताया है। NDRF के दिशा-निर्देशों के तहत, राज्य ने केंद्र से लगभग 11,000 से 11,500 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। केंद्र की तीन टीमें राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई राशि जारी नहीं की गई है।

परमेश्वर ने बताया कि सूखे का असर पेयजल की उपलब्धता पर भी पड़ा है और कई गांवों में पानी की कमी हो गई है। सरकार ने तत्काल राहत उपायों के लिए धन जारी कर दिया है और उपायुक्तों को लोगों की मदद करने के निर्देश दिए हैं।

किसानों को अन्य राहत

तत्काल वित्तीय सहायता के अलावा, सरकार ने बैंकों को कृषि ऋणों की वसूली स्थगित करने के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बैंकों द्वारा भेजे गए नोटिसों से चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि निजी वित्तीय संस्थानों और राष्ट्रीयकृत बैंकों को भी ऋण वसूली टालने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार का ध्यान तत्काल राहत पर है और कृषि ऋण माफी जैसी मांगों पर बाद में विचार किया जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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