वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत दिवालिया घोषित, SBI वसूलेगा ₹12,668 करोड़
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को अब आधिकारिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दिया गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने यह फैसला सुनाते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को उनसे…
वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को अब आधिकारिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दिया गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने यह फैसला सुनाते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को उनसे 12,668 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला धूत द्वारा वीडियोकॉन समूह की कंपनियों के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है।
NCLT की मुंबई बेंच ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) की धारा 123 के तहत SBI की याचिका को मंजूरी दी। इस आदेश के बाद, एक व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर धूत के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
SBI के अनुसार, 30 सितंबर तक वेणुगोपाल धूत पर ब्याज और जुर्माने सहित कुल 12,668.06 करोड़ रुपये की देनदारी थी। यह बकाया उन व्यक्तिगत गारंटियों से संबंधित है जो धूत ने वीडियोकॉन ग्रुप की विभिन्न कंपनियों को दिए गए कर्जों के लिए दी थीं। इन कर्जों में टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल जैसी सुविधाएं शामिल थीं। जब समूह की कंपनियां कर्ज चुकाने में विफल रहीं, तो बैंक ने फरवरी 2018 में इन गारंटियों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की।
क्यों खारिज हुई धूत की भुगतान योजना?
दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान, धूत ने कर्ज चुकाने के लिए एक भुगतान योजना पेश की थी। उन्होंने सिलीगुड़ी में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के जरिए तीन साल में 600 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव दिया। यह रकम कुल स्वीकृत दावों के 1 प्रतिशत से भी कम थी। हालांकि, इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं (लेनदारों) ने खारिज कर दिया। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा था कि यह योजना भविष्य की मंजूरियों और अनिश्चित नकदी प्रवाह पर निर्भर थी और इसमें कोई अग्रिम भुगतान शामिल नहीं था।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
भुगतान योजना विफल होने के बाद, ट्रिब्यूनल ने इस साल जुलाई में इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया समाप्त कर दी और SBI को दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की इजाजत दी। अब ट्रिब्यूनल ने आशीष नारायण को इस मामले में 'बैंकरप्सी ट्रस्टी' नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे धूत की सभी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेकर उनका प्रबंधन करें और लेनदारों के बीच उनका वितरण सुनिश्चित करें। बैंकरप्सी ट्रस्टी को 90 दिनों के भीतर NCLT को एक प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।
इनपुट: IANS



