तमिलनाडु: दो स्कूलों पर धार्मिक भेदभाव का आरोप, भाजपा अध्यक्ष ने की आपराधिक कार्रवाई की मांग
तमिलनाडु में दो अलग-अलग स्कूलों पर हिंदू छात्रों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगा है। राज्य भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इन घटनाओं को लेकर सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार…
तमिलनाडु में दो अलग-अलग स्कूलों पर हिंदू छात्रों के साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगा है। राज्य भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इन घटनाओं को लेकर सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा है और आरोपी स्कूल प्रमुखों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नागेंद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से थूथुकुडी और कन्याकुमारी जिलों में हुई इन घटनाओं का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बच्चों के मन पर गहरा आघात पहुंचा सकती हैं और उनकी पहचान की भावना को कमजोर कर सकती हैं।
क्या हैं पूरे आरोप?
एक घटना थूथुकुडी जिले के अथुर स्थित एक स्कूल की है। आरोप है कि वहां के हेडमास्टर ने दशहरा के उपलक्ष्य में व्रत रख रहे 30 से अधिक छात्रों को उनकी पहनी हुई धार्मिक मालाएं हटाने का आदेश दिया। नागेंद्रन ने यह भी दावा किया कि इस दौरान छात्रों के साथ मारपीट भी की गई।
दूसरी घटना कन्याकुमारी जिले के थक्कलई की बताई जा रही है। यहां एक स्कूल की प्रधानाध्यापिका पर 10वीं कक्षा की एक छात्रा को अपनी चूड़ियां छिपाने के लिए कहने का आरोप लगाया गया है। भाजपा नेता ने इन घटनाओं को छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में चिंताजनक हस्तक्षेप करार दिया है।
सरकार और स्कूल प्रशासन पर निशाना
नैनार नागेंद्रन ने इन कथित घटनाओं को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए स्कूल प्रशासन से तत्काल जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से विजय सरकार सत्ता में आई है, धार्मिक दमन की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
उन्होंने सरकार और उसके मंत्रियों पर धार्मिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी रवैये ने स्कूल प्रशासनों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। नागेंद्रन ने सत्ताधारी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (टीवीके) सरकार से इस तरह के रवैये को खत्म करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को समानता और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए और छात्रों की आस्था व पूजा के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
इनपुट: IANS



