त्रिपुरा: एक दशक के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को ग्राम समिति चुनाव, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
त्रिपुरा में दस साल के बाद सोमवार को आदिवासी स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत आने वाली ग्राम समितियों के लिए मतदान होने जा रहा है। इस अहम चुनाव के लिए महीने भर से चल रहा प्रचार अभियान शनिवार…
त्रिपुरा में दस साल के बाद सोमवार को आदिवासी स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत आने वाली ग्राम समितियों के लिए मतदान होने जा रहा है। इस अहम चुनाव के लिए महीने भर से चल रहा प्रचार अभियान शनिवार दोपहर को समाप्त हो गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा और इसके लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
इन चुनावों को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये आदिवासी इलाकों में स्थानीय शासन की नींव हैं। मैदान में एक तरफ सत्तारूढ़ भाजपा अपने सहयोगी दलों टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) के साथ है, तो दूसरी तरफ उनका मुकाबला CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे और कांग्रेस के गठबंधन से है।
भारी सुरक्षा बल की तैनाती
चुनावों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की लगभग 74 कंपनियां (करीब 5,000 जवान) और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) व राज्य पुलिस के 10,000 जवान शामिल हैं। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा बढ़ाई है ताकि मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत के बाद 2,954 सीटों पर मतदान
त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (TSEC) ने शुरुआत में 587 ग्राम समितियों की 4,597 सीटों पर चुनाव की घोषणा की थी। हालांकि, एक बड़ी संख्या में सीटें निर्विरोध ही तय हो गईं। TSEC के एक अधिकारी के अनुसार, टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने 1,557 सीटें (33.87%) और भाजपा ने 81 सीटें (1.76%) बिना किसी मुकाबले के जीत ली हैं।
इसके बाद अब राज्य के आठ जिलों के 44 ब्लॉकों में बची हुई 2,954 सीटों के लिए सोमवार को मतदान होगा। कुल 1,069 उम्मीदवारों द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद अब 9,820 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौरतलब है कि TTAADC का गठन भारतीय संविधान में 49वें संशोधन के बाद 1 अप्रैल, 1985 को हुआ था और इसका अधिकार क्षेत्र राज्य के लगभग दो-तिहाई हिस्से पर है।
इनपुट: IANS



