रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

BJP सांसद ने दिल्ली के वोटर लिस्ट विवाद को भारत-बांग्लादेश के पुराने सीमा मुद्दे से जोड़ा, साजिश का आरोप लगाया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को भारत-बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद से…

BJP सांसद ने दिल्ली के वोटर लिस्ट विवाद को भारत-बांग्लादेश के पुराने सीमा मुद्दे से जोड़ा, साजिश का आरोप लगाया
(फोटो: IANS)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को भारत-बांग्लादेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद से जोड़ दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया है कि सीमा पर ऐतिहासिक विसंगतियों के कारण हुए अवैध प्रवासन का असर आज भी मतदाता सूचियों पर दिख रहा है और इसे दुरुस्त करना ज़रूरी है।

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रेड्डी ने इन विरोध प्रदर्शनों और इससे जुड़े डिजिटल अभियानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को हटाने के लिए एक "समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास" का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रमुक समेत कई विपक्षी दल और संगठन एक साझा उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी को हराना और सत्ता परिवर्तन करना है।

पुराना सीमा विवाद और नया मतदाता सूची संघर्ष

एक वायरल वीडियो में, तेलंगाना से सांसद रेड्डी ने 2015 से पहले की भारत-बांग्लादेश सीमा को दुनिया की सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक बताया। उन्होंने समझाया कि भारत के 111 एन्क्लेव (छिटमहल) बांग्लादेश के भीतर थे, जबकि बांग्लादेश के 51 एन्क्लेव भारत में थे। इस जटिल व्यवस्था के कारण वहां के निवासियों को दशकों तक नागरिकता और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

उनके अनुसार, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने भूमि सीमा समझौते के माध्यम से इस समस्या का समाधान किया था। उन्होंने कहा, "ऐसी मूर्खतापूर्ण सीमाएं राजनीतिक हितों के लिए बनाई गई थीं। ये विभाजन के समय से लेकर हाल तक, यानी 2015 तक जारी रहीं, जब नरेंद्र मोदी सरकार आई।"

SIR प्रक्रिया पर आरोप-प्रत्यारोप

भाजपा सांसद ने दिल्ली में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को इसी ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ा। उनका मानना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण अवैध और अपात्र नामों की पहचान के लिए एक आवश्यक कदम है।

वहीं, इस प्रक्रिया के आलोचकों का दावा है कि इसके तहत 13 करोड़ से ज़्यादा नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से काटे गए हैं, और वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वोट बैंक की राजनीति और बाहरी दबाव का आरोप

कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक संरक्षण के तहत अवैध प्रवासन को बढ़ावा दिया गया और इसका इस्तेमाल वोट बैंक की राजनीति के लिए हुआ। उन्होंने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और असम जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इसका असर हैदराबाद, दिल्ली, बिहार और ओडिशा तक महसूस किया जा रहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या में कथित हेरफेर का भी आरोप लगाया और भारत की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करने वाले संभावित बाहरी दबावों पर भी चिंता जताई। रेड्डी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत इन चुनौतियों के बावजूद अपनी रणनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता बनाए रखने में सफल रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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