केरल: CPI(M) नेता पर यौन उत्पीड़न के आरोप, मुख्यमंत्री विजयन की चुप्पी पर उठे सवाल
केरल में सत्तारूढ़ CPI(M) के पलक्कड़ जिला सचिव पद से ई.एन. सुरेश बाबू को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में एक आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग…
केरल में सत्तारूढ़ CPI(M) के पलक्कड़ जिला सचिव पद से ई.एन. सुरेश बाबू को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में एक आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिससे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दबाव में आ गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी से भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब मंगलवार को राज्य कांग्रेस सचिव जॉन डेनियल ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को एक औपचारिक शिकायत सौंपी। इस शिकायत में मांग की गई है कि न केवल सुरेश बाबू के खिलाफ, बल्कि मुख्यमंत्री विजयन और CPI(M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए।
आरोपों को छिपाने का दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को इन गंभीर आरोपों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे पुलिस को सौंपने के बजाय मामले को छिपाया और पार्टी के स्तर पर ही निपटाने की कोशिश की। डेनियल ने कहा कि यह मुद्दा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण विशेष रूप से गंभीर है और उन्होंने पुलिस जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद एक युवा महिला वकील द्वारा लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि वकील ने CPI(M) नेतृत्व से संपर्क कर सुरेश बाबू पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और अपनी शिकायत के साथ डिजिटल सबूत भी पेश किए थे। महिला का यह भी आरोप है कि शिकायत के बाद भी सुरेश बाबू ने उनसे संपर्क करना और उन्हें परेशान करना जारी रखा।
हालांकि पार्टी ने सुरेश बाबू को उनके पद से हटा दिया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस कार्रवाई का कारण यही शिकायत है या कुछ और। जब पत्रकारों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री विजयन से इस बारे में सवाल किया, तो वे चुप रहे। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं जैसे के.के. शैलजा, ई.पी. जयराजन, एम.वी. जयराजन, वी.एन. वासवन और थॉमस इसहाक ने भी इस पर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया।
इनपुट: IANS



