मिज़ोरम में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 8 महीने में 846 करोड़ की जब्ती, 930 तस्कर गिरफ्तार
मिजोरम में इस साल ड्रग्स के खिलाफ़ अभियान में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन नशे की लत से होने वाली मौतें एक गंभीर चिंता बनी हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने जनवरी से…
मिजोरम में इस साल ड्रग्स के खिलाफ़ अभियान में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन नशे की लत से होने वाली मौतें एक गंभीर चिंता बनी हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने जनवरी से अगस्त के बीच आठ महीनों में राज्य भर से 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 930 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 111 विदेशी नागरिक हैं, और इनमें ज़्यादातर म्यांमार के हैं।
इन आठ महीनों में जब्त किए गए ड्रग्स में सबसे ज़्यादा मात्रा अत्यधिक नशीली हेरोइन और मेथामफेटामाइन टैबलेट्स की है। इस अवधि में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत कुल 635 मामले दर्ज किए गए।
नशे से मौतें और सरकार की नई रणनीति
नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने की कोशिशों के बावजूद, राज्य में ड्रग्स के सेवन से होने वाली मौतें चिंताजनक हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अगस्त तक 45 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। पिछले साल (2023) यह आंकड़ा 118 था, जिसमें 18 महिलाएं थीं।
राज्य सरकार ने म्यांमार से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विशेष रूप से चौकसी बढ़ा दी है। मिजोरम के गृह मंत्री के. सपडांगा ने एक जागरूकता अभियान में कहा कि सरकार राज्य को ड्रग्स के खतरे से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सिर्फ ड्रग्स बेचने वालों और ले जाने वालों को ही नहीं, बल्कि इस कारोबार से जुड़े सभी लोगों की भी अच्छी तरह से जांच की जानी चाहिए और उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।”
सामाजिक सहयोग पर ज़ोर
गृह मंत्री सपडांगा ने इस समस्या से निपटने के लिए एक सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया है, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और चर्चों की भागीदारी भी हो। उन्होंने सोमवार को राज्यपाल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा लॉन्च किए गए 'स्टेट एक्शन प्लान' को प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही।
उन्होंने नशे की लत से जूझ रहे लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने पर भी जोर दिया ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। साथ ही, शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान तेज़ करने और त्लांगमावी गांव का उदाहरण देते हुए अन्य समुदायों को भी अपने क्षेत्र को नशा-मुक्त बनाने के लिए प्रेरित किया।
मिजोरम की भौगोलिक स्थिति इसे ड्रग्स तस्करी के लिए संवेदनशील बनाती है। राज्य के छह जिले म्यांमार के साथ एक लंबी और बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं, जो इसे 'गोल्डन ट्राएंगल' से आने वाले नशीले पदार्थों के लिए एक प्रमुख मार्ग बना देता है।
इनपुट: IANS



