बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु: दूध की बढ़ी कीमतों का लाभ किसानों तक नहीं, भुगतान में कटौती से तिरुचि में रोष

तमिलनाडु में सरकार द्वारा दूध की खरीद दरें बढ़ाने के बावजूद तिरुचि जिले के दुग्ध उत्पादक किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने शिकायत की है कि सहकारी दुग्ध समितियों द्वारा उनके…

तमिलनाडु: दूध की बढ़ी कीमतों का लाभ किसानों तक नहीं, भुगतान में कटौती से तिरुचि में रोष
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में सरकार द्वारा दूध की खरीद दरें बढ़ाने के बावजूद तिरुचि जिले के दुग्ध उत्पादक किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने शिकायत की है कि सहकारी दुग्ध समितियों द्वारा उनके भुगतान में कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें घोषित दर से कम पैसा मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 3 अक्टूबर को किसानों के बैंक खातों में पैसा आने के बाद सामने आया।

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राज्य सरकार ने हाल ही में गाय के दूध की खरीद कीमत 38 रुपये से बढ़ाकर 44 रुपये प्रति लीटर कर दी थी, यानी 6 रुपये की बढ़ोतरी। वहीं, भैंस के दूध का भाव 53 रुपये प्रति लीटर तय किया गया था। लेकिन किसानों का आरोप है कि उन्हें बढ़ी हुई दर का पूरा फायदा दिए बिना 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर ली गई, जिससे उन्हें सिर्फ 40 रुपये प्रति लीटर का ही भुगतान हुआ।

कटौती पर समिति और प्रबंधन के अलग-अलग तर्क

किसानों द्वारा कारण पूछे जाने पर सहकारी समितियों के अधिकारियों ने बताया कि यह कटौती कर्मचारियों के वेतन, प्रशासनिक खर्च, त्योहार बोनस और महीने के अंत में दिए जाने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) के लिए की गई है। किसानों को दिए गए विवरण के मुताबिक, वेतन और प्रशासन के लिए 1.85 रुपये, पोंगल बोनस के लिए 1.15 रुपये और प्रोत्साहन राशि के लिए 1 रुपये प्रति लीटर काटा गया।

हालांकि, आविन (Aavin) के तिरुचि प्रबंधन ने कटौती को लेकर एक अलग ही स्पष्टीकरण दिया है। प्रबंधन के अनुसार, सहकारी समितियों के प्रशासनिक खर्च के लिए 1.75 रुपये प्रति लीटर और किसानों को बाद में भुगतान के लिए 1 रुपया रखा जा रहा है। इस हिसाब से 2.75 रुपये की कुल कटौती के बाद किसानों के खाते में 41.25 रुपये प्रति लीटर भेजे जाएंगे। प्रबंधन ने यह भी कहा कि बोनस के लिए कोई अलग से कटौती नहीं होगी और प्रशासनिक खर्च के लिए जमा 1.75 रुपये में से ही इसका भुगतान किया जाएगा।

किसानों ने की पूरा भुगतान जारी करने की मांग

बढ़ते चारे, पशु आहार और अन्य लागतों का हवाला देते हुए किसानों का कहना है कि इस कटौती ने मूल्य वृद्धि से मिली राहत को लगभग खत्म कर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब प्रोत्साहन राशि बाद में किसानों को ही देनी है, तो पहले 1 रुपया काटने की क्या ज़रूरत है।

दुग्ध उत्पादकों ने सरकार से आग्रह किया है कि समितियों के प्रशासनिक खर्चों का वहन सरकार खुद करे, न कि इसका बोझ किसानों पर डाला जाए। उन्होंने दुग्ध संघ से तत्काल पूरी राशि जारी करने की अपील की है ताकि बढ़ी हुई कीमतों का लाभ सीधे उन तक पहुंच सके।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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