तमिलनाडु: मेट्टूर बांध का जलस्तर गिरा, कावेरी डेल्टा के किसानों की फसल पर संकट के बादल
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की 45 दिनों की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। बांध के जलस्तर में भारी…
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की 45 दिनों की अवधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। बांध के जलस्तर में भारी गिरावट और पानी की कम आवक के चलते यह संकट पैदा हुआ है, जबकि किसानों का कहना है कि उनकी फसलों को अभी भी पानी की सख्त ज़रूरत है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अपर्याप्त मॉनसून के कारण इस साल मुख्यमंत्री विजय ने 1 सितंबर को डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। सामान्य तौर पर, यह पानी 12 जून को छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार देरी के साथ यह भी घोषणा की गई थी कि आपूर्ति केवल 45 दिनों तक ही जारी रहेगी।
जल भंडारण में भारी गिरावट
पानी छोड़े जाने की इस अवधि में बांध का जलस्तर लगभग 32 फीट तक नीचे आ गया है। 1 सितंबर को बांध का जलस्तर 91 फीट था, जो बुधवार शाम तक घटकर महज़ 59.13 फीट रह गया। यह गिरावट लगातार सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने और बांध में पानी की पर्याप्त आवक न होने के दबाव को दर्शाती है।
बुधवार को बांध में पानी की आवक (इनफ्लो) सिर्फ 696 घन फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) थी, जबकि निकासी कहीं ज़्यादा थी। भंडारण में लगातार गिरावट को देखते हुए बुधवार शाम को ही सिंचाई के लिए छोड़े जा रहे पानी की मात्रा को 12,000 क्यूसेक से घटाकर 10,000 क्यूसेक कर दिया गया था। इस अवधि में अधिकतम 15,000 क्यूसेक तक पानी छोड़ा गया था।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ कावेरी डेल्टा के किसान राज्य सरकार से पानी की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जलाशय का घटता स्तर सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार को किसानों की तत्काल ज़रूरतों और बांध में सीमित जल भंडार के बीच संतुलन बनाना होगा। अब सभी की निगाहें उत्तर-पूर्वी मॉनसून पर टिकी हैं, जिसके मज़बूत होने पर ही बांध में पानी का बहाव सुनिश्चित हो सकेगा।
इनपुट: IANS



