मेट्टूर बांध में घटता पानी: कावेरी डेल्टा के किसान सांबा धान की बुवाई के लिए चिंतित
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में हज़ारों किसान अपनी सांबा धान की फसल की बुवाई को लेकर चिंता में हैं। उनकी चिंता का मुख्य कारण मेट्टूर बांध के जलस्तर में लगातार हो रही गिरावट है। समाचार एजेंसी…
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में हज़ारों किसान अपनी सांबा धान की फसल की बुवाई को लेकर चिंता में हैं। उनकी चिंता का मुख्य कारण मेट्टूर बांध के जलस्तर में लगातार हो रही गिरावट है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बांध से सिंचाई के लिए छोड़े जा रहे पानी की मात्रा उसमें आ रहे पानी से आठ गुना से भी ज़्यादा है, जिससे जलस्तर तेज़ी से घट रहा है।
रविवार सुबह 8 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, मेट्टूर बांध का जलस्तर गिरकर 80.52 फीट पर आ गया, जो पहले 81.16 फीट था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बांध में पानी की आवक (आगमन) घटकर केवल 1,488 क्यूसेक रह गई, जबकि डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई ज़रूरतों के लिए 12,400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। इस भारी अंतर के कारण बांध में पानी का कुल भंडारण अब 42.47 हज़ार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) ही बचा है।
सिंचाई के पानी का लंबा इंतज़ार
इस साल मेट्टूर बांध को सामान्य तारीख़ 12 जून के बजाय देरी से 1 सितंबर को खोला गया था। इसके बाद ग्रैंड एनीकट से कावेरी, वेन्नार, ग्रैंड एनीकट नहर और कोल्लिडम सिस्टम में 6 सितंबर से पानी छोड़ा जाना शुरू हुआ। इसके बावजूद, डेल्टा के कई किसानों का कहना है कि बांध खुलने के लगभग चार हफ़्ते बाद भी उनके खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुँचा है।
किसानों का कहना है कि नहरों और ख़ासकर टेल-एंड (आखिरी छोर) के इलाक़ों में पानी न पहुँचने के कारण वे सांबा धान की बुवाई शुरू करने से हिचक रहे हैं। धान की नई फ़सल को शुरुआती दिनों में लगातार पानी की ज़रूरत होती है, और पानी की आपूर्ति अनिश्चित होने की स्थिति में फ़सल खराब होने का खतरा है।
कम होता समय और बढ़ता संकट
बांध के देरी से खुलने के कारण किसानों के पास खेत तैयार करने, नर्सरी लगाने और रोपाई के लिए पहले ही समय कम हो गया है। जो किसान इंतज़ार कर रहे हैं, उनके लिए सांबा का मौसम हाथ से निकलने का डर है। वहीं, पानी की आवक और निकासी के बीच का बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि मौजूदा सिंचाई ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बांध का पानी तेज़ी से ख़त्म हो रहा है। अब सभी की निगाहें बांध के जलस्तर और नहरों में पानी की आपूर्ति पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



