बांग्लादेश में खसरा का बढ़ता संकट: इस साल 1200 से ज़्यादा बच्चों की मौत, सरकार पर लापरवाही के आरोप
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप लेता जा रहा है, जहाँ इस साल अब तक 1,269 बच्चों की जान जा चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केवल बुधवार को ही पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से कम…
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गंभीर रूप लेता जा रहा है, जहाँ इस साल अब तक 1,269 बच्चों की जान जा चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केवल बुधवार को ही पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से कम से कम छह और बच्चों की मौत हो गई, जिन्हें संदिग्ध खसरा मामले के रूप में दर्ज किया गया है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, खसरे से हुई कुल मौतों में से 105 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,164 मौतें संदिग्ध मानी जा रही हैं। बुधवार सुबह तक, 24 घंटे की अवधि में खसरे के 1,325 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 2,34,148 तक पहुँच गई। इसी दौरान 77 नए पुष्ट मामले भी दर्ज हुए, और अब कुल पुष्ट मामलों का आँकड़ा 24,150 हो गया है।
सरकार पर लापरवाही और टीकाकरण में विफलता के आरोप
इस संकट को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पिछले महीने 'द संडे गार्डियन' से बातचीत में सरकारी लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के कारण वैक्सीन की खरीद प्रभावित हुई, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम में एक बड़ा अंतर पैदा हो गया। हसीना ने दावा किया कि मार्च 2026 में बांग्लादेश में खसरा-रूबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था, जिसके बाद टीकाकरण की दर तेजी से गिरी।
उन्होंने तारीक रहमान के नेतृत्व वाली मौजूदा बीएनपी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि जब बीमारी की गंभीरता स्पष्ट हो गई, तब भी अधिकारियों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए। शेख हसीना ने कहा, "एक ऐसी बीमारी से, जिसे रोका जा सकता है, एक हजार से ज्यादा बच्चों की मौत होना कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।"
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौती
पूर्व प्रधानमंत्री ने इस स्थिति से निपटने के लिए वैक्सीन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने, कमजोर समुदायों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने जैसी कई माँगें रखी हैं। वहीं, DGHS में रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने पिछले महीने कहा था कि महामारी पर जल्द काबू पाना आसान नहीं होगा। द डेली स्टार अखबार के अनुसार, बीमारी के तेजी से फैलने के कारण इसके प्रभाव को कम करने में अभी और समय लग सकता है, भले ही यूनिसेफ के माध्यम से अप्रैल में वैक्सीन खरीद और आपातकालीन टीकाकरण अभियान दोबारा शुरू कर दिए गए हों।
इनपुट: IANS



