सोमवार, 2 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

मतुआ समुदाय के लिए सुवेंदु अधिकारी का बड़ा वादा: जेल से रिहाई, जमीन और मकान देने की घोषणा

पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश से आए मतुआ शरणार्थियों को नागरिकता, आवास और जमीन देने का वादा किया है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि पिछली सरकार के दौरान जेल में डाले गए…

मतुआ समुदाय के लिए सुवेंदु अधिकारी का बड़ा वादा: जेल से रिहाई, जमीन और मकान देने की घोषणा
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश से आए मतुआ शरणार्थियों को नागरिकता, आवास और जमीन देने का वादा किया है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि पिछली सरकार के दौरान जेल में डाले गए समुदाय के लोगों को रिहा किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अधिकारी ने यह घोषणा उत्तरी 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में आयोजित दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए की।

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सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 31 दिसंबर, 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत आने वाले मतुआ शरणार्थियों को पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी और फिर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। उन्होंने इस साल 31 दिसंबर तक समुदाय के लोगों को सीएए प्रमाणपत्र देने का भी वादा किया।

जेलों में बंद लोगों की रिहाई

अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने मतुआ समुदाय सहित कई हिंदू शरणार्थियों को चुन-चुनकर गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा कि उत्तरी 24 परगना के बनगांव और बारासात तथा नदिया जिले के राणाघाट के सुधार गृहों में अगर कोई मतुआ शरणार्थी बिना मुकदमे के बंद है, तो उसे सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा। इसके बाद उन्हें जमीन और मकान भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

घोषणा का संदर्भ

यह घोषणा मतुआ समुदाय के पैतृक घर 'ठाकुरबाड़ी' में हुए एक सम्मेलन के दौरान की गई। अधिकारी ने अपने संबोधन में बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद हिंदुओं पर हुए कथित अत्याचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक पुराने वादे का हवाला देते हुए कहा कि 31 दिसंबर 2024 तक भारत में प्रवेश करने वालों को पुलिस परेशान नहीं करेगी। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा, "देश और राज्य को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हिंदू अपनी ही धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।"

उल्लेखनीय है कि मतुआ एक पिछड़ा हिंदू समुदाय है जो मूल रूप से पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से है और आजादी के बाद से अलग-अलग समय पर पश्चिम बंगाल में आकर बसता रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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