शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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तुम्मिडिहट्टी बैराज: तेलंगाना को महाराष्ट्र से बातचीत की उम्मीद, 2 लाख एकड़ की सिंचाई का सवाल

गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच जल्द ही अहम बातचीत हो सकती है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र…

तुम्मिडिहट्टी बैराज: तेलंगाना को महाराष्ट्र से बातचीत की उम्मीद, 2 लाख एकड़ की सिंचाई का सवाल
(फोटो: IANS)

गोदावरी नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडिहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच जल्द ही अहम बातचीत हो सकती है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र के उनके समकक्ष देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमत हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घोषणा के बाद तेलंगाना सरकार ने अधिकारियों को महाराष्ट्र के साथ होने वाली बैठक की तैयारियों में जुटने का निर्देश दिया है।

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यह बैराज अविभाजित आदिलाबाद जिले की लगभग 2 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री रेड्डी ने इस क्षेत्र को वन, आदिवासी आबादी और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन वाला इलाका बताते हुए परियोजना के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक चर्चा से इस आदिवासी बहुल क्षेत्र की दशकों पुरानी पानी की समस्या का समाधान हो सकेगा।

बैराज की ऊंचाई पर टिका है भविष्य

शुक्रवार को हुई एक समीक्षा बैठक में बैराज की ऊंचाई और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क और सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी की मौजूदगी में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बैराज की ऊंचाई 152 मीटर रखने पर महाराष्ट्र में करीब 2,300 एकड़ भूमि प्रभावित हो सकती है। वहीं, अगर ऊंचाई 150 मीटर रखी जाती है, तो डूब क्षेत्र 1,000 एकड़ से भी कम रह जाएगा।

पहले महाराष्ट्र 148 मीटर ऊंचे बैराज के लिए सहमति जता चुका है, लेकिन तेलंगाना सरकार का मानना है कि इतनी कम ऊंचाई पर जरूरी मात्रा में पानी का मोड़ संभव नहीं होगा। इसलिए, अब तेलंगाना का प्रयास जल उपलब्धता और तकनीकी पहलुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र को 152 मीटर की ऊंचाई के लिए मनाना है।

तैयारियों के कड़े निर्देश

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे महाराष्ट्र में संभावित डूब क्षेत्र का सटीक आकलन करें। उन्होंने कहा कि एक बार बैराज की ऊंचाई पर स्पष्टता बन जाए, तो तुम्मिडिहट्टी से येल्लमपल्ली तक पानी ले जाने के रास्ते और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तेजी से काम किया जाए। इसके अलावा, केंद्रीय जल आयोग की मौजूदगी में दिल्ली में हुई पिछली बैठकों का पूरा रिकॉर्ड तैयार रखने को भी कहा गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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