अन्नामलाई के विवादित बयान का मामला: आपराधिक केस रद्द करने की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने 2023 में दिए एक विवादित बयान से जुड़े आपराधिक मामले को खत्म करने की मांग की थी…
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने 2023 में दिए एक विवादित बयान से जुड़े आपराधिक मामले को खत्म करने की मांग की थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला पसुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर और मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर पर की गई उनकी टिप्पणी से संबंधित है।
न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरायण ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुरक्षित रखा। अन्नामलाई के वकील अरुण सी. मोहन और शिकायतकर्ता सलेम के सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष मानुष के वकील वी. सुरेश ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क पेश किए।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद अन्नामलाई के उस बयान से शुरू हुआ जो उन्होंने द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान के जवाब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। अन्नामलाई ने कथित तौर पर कहा था कि 1956 में पसुम्पोन मुथुरामलिंगा थेवर ने चेतावनी दी थी कि अगर नास्तिक लोग आस्थावानों का अपमान करते रहे, तो मीनाक्षी अम्मन के लिए "रक्त अभिषेक" किया जाएगा। इसी बयान के आधार पर पीयूष मानुष ने नवंबर 2023 में एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी।
दोनों पक्षों ने अदालत में क्या दलीलें दीं?
अन्नामलाई के वकील का तर्क: अन्नामलाई के वकील अरुण सी. मोहन ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने केवल एक राजनीतिक राय रखी थी और थेवर तथा पूर्व मुख्यमंत्री सी. अन्नादुरई के बीच दर्ज एक ऐतिहासिक असहमति का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने बिना किसी प्रारंभिक जांच के या अन्नामलाई को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही कार्रवाई शुरू कर दी।
शिकायतकर्ता के वकील का तर्क: वहीं, पीयूष मानुष की ओर से वकील वी. सुरेश ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अन्नामलाई ने सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने के इरादे से भड़काऊ बयान दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि ये टिप्पणियां भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153ए (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505(1)(सी) (एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ उकसाना) के तहत आती हैं, इसलिए मुकदमा जारी रहना चाहिए।
मामले में अब तक की कार्यवाही
इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु सरकार ने 28 अप्रैल, 2024 को अन्नामलाई पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद, सलेम के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लेते हुए फरवरी 2026 में उन्हें समन जारी किया था, जिसके खिलाफ अन्नामलाई ने हाईकोर्ट का रुख किया था। अब हाईकोर्ट इस याचिका पर अपना अंतिम फैसला बाद में सुनाएगा।
इनपुट: IANS



