अजित कुमार हिरासत मौत मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने 4 पुलिसकर्मियों की रिमांड रद्द करने की अर्जी खारिज की
मद्रास हाईकोर्ट ने मंदिर के सुरक्षा गार्ड बी. अजित कुमार की हिरासत में हुई मौत के सनसनीखेज मामले में आरोपी चार पुलिसकर्मियों की न्यायिक रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। समाचार एजेंसी…
मद्रास हाईकोर्ट ने मंदिर के सुरक्षा गार्ड बी. अजित कुमार की हिरासत में हुई मौत के सनसनीखेज मामले में आरोपी चार पुलिसकर्मियों की न्यायिक रिमांड को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को दिए अपने फैसले में अदालत ने निचली अदालत को इस मामले की सुनवाई नौ महीने के भीतर पूरी करने का भी निर्देश दिया है।
यह मामला जून 2025 का है, जब 29 वर्षीय सुरक्षा गार्ड अजित कुमार की पुलिस पूछताछ के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हिरासत में हिंसा को लेकर काफी गुस्सा देखने को मिला था, जिसके दबाव में तमिलनाडु सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी।
किन पुलिसकर्मियों ने दायर की थी याचिका?
यह याचिका मनमदुरै के पूर्व पुलिस उपाधीक्षक इन. शन्मुगसुंदरम, तिरुप्पुवनम के पूर्व इंस्पेक्टर एसपी रमेश कुमार, विशेष सब-इंस्पेक्टर एस. शिवकुमार और हेड कांस्टेबल जी. इलैयाराजा ने दायर की थी। इन चारों को मदुरै की एक निचली अदालत ने 16 सितंबर को 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। याचिकाकर्ताओं ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका में क्या दलीलें दी गईं?
याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने दलील दी कि वे जांच में लगातार सहयोग कर रहे थे और निचली अदालत में नियमित रूप से पेश हो रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें पहले ही गिरफ्तारी से न्यायिक सुरक्षा मिल चुकी थी, इसलिए बाद में उन्हें रिमांड पर भेजना अनुचित था।
हालांकि, अजित कुमार के परिवार की ओर से पेश वकील ने उनकी रिहाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि आरोपी बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और मुकदमे की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिमांड को बरकरार रखा।
मामले की पृष्ठभूमि
मदपुरम भद्रकाली अम्मन मंदिर में काम करने वाले अजित कुमार की 28 जून, 2025 को तब मृत्यु हो गई थी, जब उन्हें आभूषण चोरी के एक मामले में एक विशेष पुलिस टीम ने हिरासत में लिया था। सीबीआई ने इस मामले में 20 अगस्त, 2025 को छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में 12 दिसंबर को एक पूरक चार्जशीट में चार और अधिकारियों के नाम जोड़े गए।
जांच में यह भी सामने आया था कि अधिकारियों ने सबूत मिटाने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, जनरल डायरी की एंट्री और मोबाइल फोन के साथ छेड़छाड़ की थी। अभियोजन पक्ष ने मुख्य गवाह, अजित के भाई नवीन कुमार को दी गई पुलिस सुरक्षा वापस लेने पर भी चिंता जताई थी।
इनपुट: IANS



