अवैध रेत खनन मामला: तमिलनाडु के पूर्व मंत्री ई.वी. वेलू को मद्रास हाई कोर्ट से राहत नहीं
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और DMK के मौजूदा व्हिप ई.वी. वेलू और उनके बेटे ई.वी. कुमारन को मद्रास हाई कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने तिरुवनमलाई…
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और DMK के मौजूदा व्हिप ई.वी. वेलू और उनके बेटे ई.वी. कुमारन को मद्रास हाई कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने तिरुवनमलाई जिले की एक झील से कथित तौर पर अवैध रेत खनन से जुड़े एक मामले में उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने बुधवार को उनकी एकतरफा अंतरिम रोक की याचिका खारिज कर दी।
यह पूरा मामला एक शिकायत पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक राजनीतिक सम्मेलन के लिए आयोजन स्थल को समतल करने के नाम पर मलप्पामबाड़ी झील से भारी मात्रा में रेत निकाली गई। शिकायतकर्ता जयराम वेंकटेशन (अरप्पोर इयक्कम) के अनुसार, इस अवैध खुदाई से सरकारी खजाने को 8.22 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
क्या हैं आरोप?
सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी निदेशालय (DVAC) द्वारा 24 सितंबर को दर्ज FIR के अनुसार, नवंबर 2025 के आसपास झील से लगभग 45,72,058 घन फीट रेत निकाली गई थी। आरोप है कि यह रेत 14 दिसंबर, 2025 को होने वाले DMK के उत्तर क्षेत्र युवा विंग के सम्मेलन स्थल को समतल करने के लिए इस्तेमाल हुई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस कंपनी की जमीन को समतल किया गया, उसमें पूर्व मंत्री के बेटे कुमारन एक निदेशक थे।
याचिका में क्या कहा गया?
76 वर्षीय वेलू और उनके 48 वर्षीय बेटे कुमारन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने FIR को रद्द करने के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। अपनी याचिका में वेलू ने दलील दी कि यह मामला मई 2026 में टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद दर्ज किया गया है। उन्होंने इसे अपने खिलाफ दूसरा DVAC मामला बताया है, जो अरप्पोर इयक्कम की शिकायत पर शुरू हुआ। राजमार्ग निर्माण से जुड़े पहले मामले को वह पहले ही चुनौती दे चुके हैं।
मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने DVAC को 6 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इनपुट: IANS



