रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

दिल्ली में वामपंथी नेताओं की हिरासत पर तमिलनाडु में आक्रोश, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे वरिष्ठ वामपंथी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में तमिलनाडु में वाम दलों ने प्रदर्शन का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS…

दिल्ली में वामपंथी नेताओं की हिरासत पर तमिलनाडु में आक्रोश, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान
(फोटो: IANS)

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे वरिष्ठ वामपंथी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में तमिलनाडु में वाम दलों ने प्रदर्शन का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान में पार्टियों ने इस कार्रवाई को 'लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला' करार देते हुए अपने कार्यकर्ताओं से जिला मुख्यालयों पर एकजुट होने की अपील की है।

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यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने वामपंथी दलों और अन्य जन संगठनों के समर्थन से आयोजित किया था। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग करना था।

दिल्ली में क्या हुआ?

वाम दलों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बल प्रयोग किया। बयान के मुताबिक, हिरासत में लिए गए नेताओं में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा और सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के नेता शामिल थे। इसके अलावा, कई युवा, छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया।

पार्टियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बंदियों को घंटों तक पुलिस की गाड़ियों में ही रखा गया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

विरोध को रोकने के लिए 'अभूतपूर्व' उपाय

संयुक्त बयान में कहा गया है कि दिल्ली जाने वाली 254 ट्रेनें रद्द कर दी गईं, 54 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और लगभग 35,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। वाम दलों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने राजनीतिक दलों और संगठनों के कार्यालयों को भी घेर लिया था ताकि कार्यकर्ताओं की आवाजाही को रोका जा सके।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों की भी अनदेखी की। इस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए तमिलनाडु की वाम इकाइयों ने अब राज्य भर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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