शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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G20 की अटलांटा बैठक: रूसी विदेश मंत्री की मौजूदगी पर पश्चिमी देशों में मतभेद, यूक्रेन की अनुपस्थिति से विवाद बढ़ा

अमेरिका के अटलांटा में हो रही G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की उपस्थिति ने पश्चिमी देशों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के साथ कूटनीतिक…

G20 की अटलांटा बैठक: रूसी विदेश मंत्री की मौजूदगी पर पश्चिमी देशों में मतभेद, यूक्रेन की अनुपस्थिति से विवाद बढ़ा
(फोटो: IANS)

अमेरिका के अटलांटा में हो रही G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की उपस्थिति ने पश्चिमी देशों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को के साथ कूटनीतिक संबंधों को लेकर इन देशों में मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने आर्थिक मुद्दों पर साझा सहमति बनाने के अमेरिका के प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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यह दो दिवसीय बैठक 30 और 31 अक्टूबर को हो रही है, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। यह आयोजन दिसंबर में मियामी में होने वाले G20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारी का हिस्सा है, जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी शिखर सम्मेलन का निमंत्रण मिला है, हालांकि उनके शामिल होने पर स्थिति अभी साफ नहीं है।

पश्चिमी एकता में दरार के संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के शुरुआती वर्षों में पश्चिमी देश मॉस्को के साथ सामान्य संबंध बहाल करने के खिलाफ एकजुट थे, लेकिन अब यह सहमति टूट रही है। सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के एसोसिएट फेलो निकोलस लॉकर ने रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी (RFE/RL) को बताया कि पहले पश्चिमी सहयोगी रूस को सामान्य कूटनीतिक बातचीत के जरिए वैधता देने से बचते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने इस मुद्दे पर सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संवाद उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है, इसलिए वह सामूहिक तस्वीर खिंचवाने से नहीं बचेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक युद्ध जारी है, रूस के साथ संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

यूक्रेन की गैर-मौजूदगी और पुराना विवाद

इस बैठक में एक और बड़ा विवाद यूक्रेन की अनुपस्थिति को लेकर है। अमेरिका ने इस बार केवल G20 के औपचारिक सदस्य देशों को ही निमंत्रण दिया, जिससे यूक्रेन अतिथि सूची से बाहर हो गया। सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस के वरिष्ठ फेलो जेम्स लैमोंड ने RFE/RL से कहा, "यूक्रेन की मौजूदगी के बिना किसी भी ठोस मुद्दे पर बातचीत नहीं की जा सकती।" उनका मानना है कि लावरोव की मौजूदगी और यूक्रेन के प्रतिनिधित्व की कमी के कारण यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा मुश्किल होगी।

यह पहली बार नहीं है जब रूस को लेकर G20 में मतभेद दिखे हैं। अगस्त में उत्तरी कैरोलिना में हुई G20 वित्त मंत्रियों की बैठक में भी यूरोपीय प्रतिनिधियों ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की रूसी समकक्ष एंटोन सिलुआनोव के साथ द्विपक्षीय बैठक पर आपत्ति जताई थी और उन्हें सामूहिक तस्वीर से बाहर रखने पर जोर दिया था।

बैठक का एजेंडा और रूस का रुख

अमेरिकी प्रशासन G20 को उसके मूल आर्थिक एजेंडे पर वापस लाना चाहता है, जिसमें आर्थिक विकास, नवाचार और व्यापार जैसे मुद्दे शामिल हैं। लेकिन विश्लेषकों को आशंका है कि यूक्रेन और ईरान के युद्ध का मुद्दा बैठक पर हावी रह सकता है।

दूसरी ओर, रूस ने भी वीजा प्रक्रिया में देरी को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के वीजा से जुड़ी प्रक्रिया आखिरी समय में पूरी हुई। सर्गेई लावरोव ने कहा है कि वह इस मंच का इस्तेमाल वैश्विक आर्थिक संस्थानों में सुधार और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए करेंगे। फिलहाल, रुबियो और लावरोव के बीच किसी द्विपक्षीय बैठक की घोषणा नहीं की गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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