लद्दाख: सोनम वांगचुक पर बातचीत का एजेंडा 'हाईजैक' करने का आरोप, सिविल सोसायटी फोरम ने उठाए सवाल
केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत को लेकर लद्दाख के राजनीतिक नेतृत्व में दरार उभरती दिख रही है। लद्दाख के 'सिविल सोसायटी फोरम' ने प्रसिद्ध नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक और शीर्ष नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते…
केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत को लेकर लद्दाख के राजनीतिक नेतृत्व में दरार उभरती दिख रही है। लद्दाख के 'सिविल सोसायटी फोरम' ने प्रसिद्ध नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक और शीर्ष नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने ज़मीन, नौकरी और संस्कृति की सुरक्षा के मूल एजेंडे को 'हाईजैक' कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, फोरम ने यह भी दावा किया कि लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) अब पूरे क्षेत्र की आवाज़ का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
यह पूरा मामला लेह में हुई फोरम की एक बैठक के बाद सामने आया, जिसमें गृह मंत्रालय के साथ बातचीत में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। इस बैठक में पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग, पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद रिग्ज़ेन स्पालबर और पूर्व MLC त्सेरिंग साम्पेल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हुए। उनके साथ थिक्से व थुक्से रिम्पोछे के प्रतिनिधि, विभिन्न मठों के भिक्षु, लद्दाख बौद्ध संघ के सदस्य और अन्य नागरिक समाज के लोग भी मौजूद थे।
बातचीत में भटकाव और टकराव का आरोप
फोरम ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान कुछ सदस्यों का रवैया टकराव वाला रहा, जिसके कारण लद्दाख की ज़मीन, नौकरियों और संस्कृति की सुरक्षा का मुख्य एजेंडा पीछे छूट गया। पूर्व सांसद थुपस्तान छेवांग ने कहा कि LAB और KDA के नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के मसौदा प्रस्ताव को बिना ठीक से जांचे ही खारिज कर दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन नेताओं ने पिछली बैठकों के नतीजों को जनता के सामने गलत तरीके से पेश किया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। छेवांग के अनुसार, बार-बार की देरी, गलत जानकारी और पहले बनी सहमति की अनदेखी के कारण ही 22 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी, जिसका लेह और खासकर बौद्ध समुदाय पर बुरा असर पड़ सकता है।
फोरम की प्रमुख मांगें और रुख
सिविल सोसायटी फोरम ने स्पष्ट किया कि बातचीत की प्रक्रिया को देरी और टकराव की राजनीति का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। फोरम ने मांग की कि सभी जिलों में पंचायत और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) के चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं और इन परिषदों को और अधिक शक्तियां दी जाएं।
इसके साथ ही, फोरम ने LAB के पुनर्गठन की भी मांग की, ताकि इसमें सभी जिलों के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रतिनिधि शामिल हों। फोरम ने बातचीत जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि ज़मीनी हकीकत को देखते हुए LAB और KDA अब पूरे लद्दाख की ओर से बोलने का दावा नहीं कर सकते।
इनपुट: IANS



