मैसूर पैलेस में मंत्रियों को रोकने का मामला: कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए, रिपोर्ट तलब
मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान हुए एक विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मुख्य सचिव को उस घटना की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है…
मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान हुए एक विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मुख्य सचिव को उस घटना की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने राज्य के तीन मंत्रियों को मैसूर पैलेस में पूजा करने से रोक दिया था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के इस व्यवहार को "अहंकारपूर्ण" और "मनमाना" करार दिया है।
यह घटना बुधवार को प्रसिद्ध जंबू सवारी जुलूस के दौरान हुई, जब मैसूर पैलेस परिसर में नंदी ध्वज पूजा का आयोजन किया जा रहा था। प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ आए मंत्रियों और विधायकों को पूजा में शामिल होने की अनुमति होती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
क्या था पूरा विवाद?
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस अधीक्षक (SP) सी.बी. ऋष्यंत ने तीन दलित मंत्रियों— कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगडगी, कृषि मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी और मुजराई मंत्री के.एस. बसवंतप्पा— को पूजा स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया। शुरुआत में केवल मैसूरु के प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया को ही मुख्यमंत्री शिवकुमार के साथ जाने दिया गया।
जब रोके गए मंत्रियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो एसपी ने कथित तौर पर उनका रास्ता रोक लिया। इस पर मंत्री शिवराज तंगडगी ने अधिकारी को धक्का देकर अपनी नाराजगी जताई। इसके बाद एसपी ने मंत्री नरेंद्र स्वामी और बसवंतप्पा को भी रोक दिया। इस झड़प के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और जांच के आदेश
हंगामा बढ़ता देख मुख्यमंत्री शिवकुमार ने तत्काल हस्तक्षेप किया और एसपी को मंत्रियों को अंदर आने देने का निर्देश दिया। बाद में गुरुवार को एक बयान जारी कर उन्होंने कहा, "मैंने मुख्य सचिव को घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना की दलित संगठनों और प्रगतिशील विचारकों ने कड़ी निंदा की है। यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर एसपी को मंत्रियों का प्रवेश रोकने का निर्देश किसने दिया था और मुख्यमंत्री के बिना किसी आदेश के ऐसा क्यों किया गया। खबरों के अनुसार, इसी एसपी ने वरिष्ठ कांग्रेस विधायक तनवीर सैत को भी पूजा स्थल पर जाने से रोका था, जिन्हें बाद में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही प्रवेश मिला।
इनपुट: IANS



