KPSC भर्ती घोटाला: पेपर लीक का मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले 14 दिन की ED हिरासत में
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े घोटाले की जांच तेज हो गई है। बेंगलुरु की एक अदालत ने मंगलवार को इस मामले के मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिनों के लिए…
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े घोटाले की जांच तेज हो गई है। बेंगलुरु की एक अदालत ने मंगलवार को इस मामले के मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले को 14 दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भेज दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED अधिकारियों ने कन्नाले को सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
इस मामले में KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार पहले से ही ED की हिरासत में हैं। गंगवार को CID ने गिरफ्तार किया था और खबरों के मुताबिक, उन्होंने यह बात स्वीकार की है कि परीक्षा से एक दिन पहले उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारी का पेपर कन्नाले को लीक किया था।
जांच के दायरे में करोड़ों का लेनदेन
जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले ने उम्मीदवारों से 12 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की थी। प्रत्येक पद के लिए 70 लाख से 90 लाख रुपये तक लिए गए थे। दस्तावेजों से पता चला है कि निलंबित IAS अधिकारी गंगवार को सीधे 1.3 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे। इसके अलावा, उन्हें 23 लाख रुपये का डायमंड नेकलेस समेत महंगी ज्वेलरी और अधिकारी व उनके एक दोस्त के लिए 65 फ्लाइट टिकटों का खर्च भी दिया गया। जांच में एक बेनामी बैंक खाते का भी पता चला है, जिसमें 1.86 करोड़ रुपये जमा थे।
कई एजेंसियां कर रहीं जांच, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
यह घोटाला अब कई एजेंसियों की जांच के दायरे में है, जिसमें CID, ED और कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) शामिल है। 21 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने भर्तियों में हुई इस हेराफेरी को 'संविधान के साथ धोखाधड़ी' करार दिया था। अदालत ने DGP आलोक कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली SIT का गठन कर जांच पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए 100 दिन का समय दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि राज्य सरकार SIT गठन के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी, क्योंकि वह इसे दखलंदाजी मानते हैं।
इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने अवैध भर्तियों को लेकर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधा है, जबकि भाजपा नेताओं का दावा है कि इस घोटाले में कई मंत्री जेल जा सकते हैं। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने KPSC की साख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि 'वहां चोर बैठे हैं' और सरकार इसे बंद करने के लिए कानूनी सलाह ले रही है।
इनपुट: IANS



