KPSC भर्ती घोटाला: CID रिपोर्ट में ₹1.5 करोड़ की हेराफेरी और OMR शीट में गड़बड़ी का खुलासा
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े घोटाले की जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया में धांधली का पता चला है। समाचार एजेंसी IANS की…
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़े घोटाले की जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया में धांधली का पता चला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच कर रही CID ने अपनी प्रगति रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंप दी है, जिसमें गिरफ्तार भाजपा नेता सहित कई बिचौलियों और अधिकारियों की भूमिका का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने अब तक 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और बैंक जमा राशि का पता लगाया है या उसे जब्त किया है। इसके अलावा, करीब 22 लाख रुपये कीमत के सोने और हीरे के गहने भी बरामद हुए हैं। यह घोटाला 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़ा है, जिसके परिणाम आने के बाद पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर और पैसे लेकर नौकरी दिलाने के गंभीर आरोप लगे थे।
पैसे का लेन-देन और बिचौलियों की भूमिका
CID की रिपोर्ट में भाजपा नेता बसवराज कनाले को एक अहम कड़ी बताया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने उम्मीदवारों से नौकरी दिलाने का वादा कर लाखों रुपये वसूले। जांच में यह सामने आया कि कम से कम तीन उम्मीदवारों ने कनाले को कुल 60 लाख रुपये नकद दिए थे, जिनमें किरण गौड़ा (10 लाख), मोहम्मद सोहेल (20 लाख) और सलीम ओंती (30 लाख) शामिल हैं।
एजेंसी ने कनाले और उनके सहयोगियों से जुड़े कई बैंक खातों में बड़ी रकम का पता लगाया है। ओम लक्ष्मी सौहार्द को-ऑपरेटिव बैंक के एक खाते में 64 लाख रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में 5.2 लाख रुपये और कनाले की पत्नी के खाते में करीब 71 लाख रुपये पाए गए। इसके अलावा, कनाले के पास से 5.60 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई।
अधिकारियों की मिलीभगत और OMR में हेरफेर
रिपोर्ट में जेल में बंद IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार की भूमिका का भी उल्लेख है, जो KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों की OMR उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर करने में मदद की थी।
यह भी खुलासा हुआ है कि ज्ञानेंद्र कुमार ने अपनी एक महिला मित्र को लगभग 20 लाख रुपये के गहने दिए थे, जिसे जांचकर्ता वित्तीय लेन-देन की कड़ी के रूप में देख रहे हैं। CID ने कनाले समेत कुल पांच बिचौलियों की पहचान की है जो इस घोटाले में शामिल थे।
अब SIT करेगी आगे की जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने अब जांच एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी है। वरिष्ठ IPS अधिकारी आलोक कुमार के नेतृत्व वाली SIT को 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने और समय-समय पर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। CID को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड SIT को हस्तांतरित करने के लिए कहा गया है।
इनपुट: IANS



