कोलकाता: 'PM वाई-फाई योजना' के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार
प्रधानमंत्री के नाम पर चल रही एक फर्जी वाई-फाई योजना का पर्दाफाश करते हुए कोलकाता पुलिस ने एक कॉल सेंटर पर छापा मारा है। इस गिरोह पर आजीवन इंटरनेट सुविधा देने का झांसा देकर देशभर के लोगों से करोड़ों…
प्रधानमंत्री के नाम पर चल रही एक फर्जी वाई-फाई योजना का पर्दाफाश करते हुए कोलकाता पुलिस ने एक कॉल सेंटर पर छापा मारा है। इस गिरोह पर आजीवन इंटरनेट सुविधा देने का झांसा देकर देशभर के लोगों से करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कॉल सेंटर के मैनेजर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पांच महिलाएं शामिल हैं।
आरोपी खुद को सरकारी प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें एक आकर्षक प्रस्ताव देते थे। उनका दावा था कि सरकार ने एक नई 'प्रधानमंत्री वाई-फाई योजना' शुरू की है, जिसके तहत एक छोटी-सी शुरुआती रकम चुकाकर जीवन भर देश में कहीं भी वाई-फाई सेवा का लाभ उठाया जा सकता है। इस लुभावने ऑफर के झांसे में आकर कई लोगों ने पैसे गंवा दिए। शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़ित देश के अलग-अलग हिस्सों से हैं, जिनमें कोलकाता के भी काफी लोग शामिल हैं।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
एक गोपनीय सूचना के आधार पर कोलकाता पुलिस के जासूसों ने बुधवार को मध्य कोलकाता के डलहौजी इलाके में स्थित गवर्नमेंट प्लेस (ईस्ट) में इस कॉल सेंटर पर दबिश दी। पुलिस ने बताया कि आरोपी एक तैयार स्क्रिप्ट का इस्तेमाल करके लोगों को फोन पर योजना के फायदे समझाते थे और भुगतान के लिए मनाते थे।
छापेमारी के दौरान कॉल सेंटर के मैनेजर कृष्णेंदु साहा को भी गिरफ्तार किया गया। मौके से जांचकर्ताओं ने कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और ग्राहकों की जानकारियों वाला एक बड़ा डेटाबेस बरामद किया है। इसके अलावा, वह लिखित स्क्रिप्ट भी जब्त की गई है, जिसका इस्तेमाल टेलीकॉलर लोगों को फंसाने के लिए करते थे।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने अब तक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के संचालन के तरीके, ठगी का शिकार हुए लोगों की कुल संख्या और इस अपराध में शामिल अन्य लोगों या संगठनों का पता लगाया जा सके। पुलिस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि सभी पीड़ितों की पहचान की जा सके।
इनपुट: IANS



