गुटनिरपेक्ष आंदोलन: 65वीं वर्षगांठ पर बेलग्रेड में जुटेंगे सदस्य देश, भारत का नेतृत्व करेंगे किरेन रिजिजू
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, 31…
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाली इस स्मृति बैठक में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को इस आयोजन की पुष्टि की। इस बैठक की थीम 'गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक' रखी गई है। भारत इस आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में से एक है और इसके सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता रहा है। यह मंच 121 विकासशील देशों को एक साथ लाता है।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का इतिहास और महत्व
गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन में पड़ी थी। इसमें शामिल देशों ने संप्रभुता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और उपनिवेशवाद के विरोध जैसे सिद्धांतों का समर्थन किया। इसके छह साल बाद, 1961 में बेलग्रेड में हुए पहले शिखर सम्मेलन के साथ यह आंदोलन औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। आज भी NAM बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में विकासशील देशों की आवाज़ को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख
इससे पहले अक्टूबर 2025 में युगांडा के कंपाला में हुई 19वीं NAM मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भारत ने अपनी बात पुरज़ोर तरीक़े से रखी थी। तब विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के साझा ख़तरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया था।
सिंह ने कहा था, “आतंकवाद एक साझा खतरा है, जिसका मुकाबला केवल व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए किया जा सकता है।” उन्होंने याद दिलाया कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवादी हमलों का शिकार रहा है और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या इसका हालिया उदाहरण है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने कहा था कि जब कोई देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति बना लेता है और आतंकवादियों का महिमामंडन करता है, तो ऐसे कृत्यों की स्पष्ट निंदा होनी चाहिए। सिंह ने इस बात पर भी चिंता जताई थी कि पहलगाम हमले पर विचार के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक सदस्य देश ने ज़िम्मेदार संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का बचाव किया था। उन्होंने NAM से आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का रुख अपनाने का आग्रह किया था।
इनपुट: IANS



