कनाडा में 'खालिस्तान जनमत संग्रह' एक दिखावा, सड़कों पर बढ़ रहा तनाव: रिपोर्ट
कनाडा में आतंकी संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) द्वारा आयोजित तथाकथित 'खालिस्तान जनमत संग्रह' को एक हालिया रिपोर्ट में केवल एक राजनीतिक दिखावा करार दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन गतिविधियों के…
कनाडा में आतंकी संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) द्वारा आयोजित तथाकथित 'खालिस्तान जनमत संग्रह' को एक हालिया रिपोर्ट में केवल एक राजनीतिक दिखावा करार दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन गतिविधियों के कारण कनाडा की सड़कों पर तनाव बढ़ा है, लेकिन भारत में इनकी कोई कानूनी मान्यता या असर नहीं है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, इस रिपोर्ट में कनाडाई समाज पर पड़ रहे इसके नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भले ही इन जनमत संग्रहों का कोई कानूनी महत्व नहीं है, फिर भी इनके चलते कनाडा में रैलियां, उकसावे वाले प्रदर्शन और टकराव की घटनाएं आम हो गई हैं। सरे और ब्रैम्पटन जैसे इलाकों में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और भारतीय राजनयिकों को धमकियां मिलने जैसी गंभीर चिंताएं भी उभरी हैं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को कुछ कार्यकर्ताओं के लिए जान के खतरे की औपचारिक चेतावनी तक जारी करनी पड़ी।
कनाडा-भारत संबंधों पर असर
रिपोर्ट यह भी बताती है कि खालिस्तान समर्थक आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या के बाद ओटावा और नई दिल्ली के बीच गहरा राजनयिक तनाव पैदा हो गया था। 'खालसा वॉक्स' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में अब दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। इस सुधार के पीछे व्यापार, ऊर्जा सहयोग और प्रस्तावित आर्थिक साझेदारी जैसे व्यावहारिक कारण हैं, हालांकि पिछला तनाव पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा के लोगों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विदेशी राजनीतिक एजेंडे को अपनी धरती पर अनिश्चित काल तक सहन करेंगे। इसका असर भारत जैसे महत्वपूर्ण इंडो-पैसिफिक साझेदार के साथ संबंधों पर पड़ता है और आम कनाडाई नागरिकों में भी नाराजगी पैदा होती है।
सिख समुदाय का रुख और सर्वेक्षण के नतीजे
रिपोर्ट इस धारणा को भी चुनौती देती है कि इस आंदोलन को कनाडा के सिख समुदाय का व्यापक समर्थन हासिल है। इसके अनुसार, अधिकांश सिख अलगाववाद का समर्थन नहीं करते और यह आंदोलन लंबे समय से एक छोटे लेकिन मुखर समूह तक ही सीमित रहा है।
इस दावे के समर्थन में, रिपोर्ट 2025 की शुरुआत में हुए एक लेजर सर्वेक्षण का हवाला देती है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सिख समुदाय का केवल एक छोटा हिस्सा ही खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों का समर्थन करता है। सर्वेक्षण के मुताबिक:
- 54% लोग इन गतिविधियों का विरोध करते हैं।
- 37% लोग इस आंदोलन का कड़ा विरोध करते हैं।
- 72% लोग कनाडा में विदेशी अलगाववादी एजेंडे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के पक्ष में हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कनाडाई समाज अब विदेशी अलगाववादी अभियानों को 'अभिव्यक्ति की आजादी' का एक हानिरहित मामला मानने को तैयार नहीं है। बड़ी आबादी इस बात से असहज है कि उनके समुदाय दूसरे देश के संघर्ष का मंच बनें और एक शोर मचाने वाला समूह देश की विदेश नीति पर अनुचित प्रभाव डाले।
इनपुट: IANS



