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लखनऊ KGMU धर्मांतरण मामला: STF रिपोर्ट में कई प्रोफेसर और डॉक्टर दोषी, सरकार ने दिए कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और उनके उत्पीड़न के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक विस्तृ…

लखनऊ KGMU धर्मांतरण मामला: STF रिपोर्ट में कई प्रोफेसर और डॉक्टर दोषी, सरकार ने दिए कार्रवाई के निर्देश
(फोटो: IANS)

लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला डॉक्टरों पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और उनके उत्पीड़न के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद संस्थान के कई प्रोफेसरों, डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसमें नामित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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यह पूरा मामला दो अलग-अलग FIR पर आधारित जांच से शुरू हुआ था। पहली FIR 23 दिसंबर 2025 को चौक पुलिस स्टेशन में पैथोलॉजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर देवार्ती मित्रा ने डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसके कुछ ही दिन बाद, 29 दिसंबर 2025 को कैसरबाग पुलिस स्टेशन में नर्सिंग स्टाफ माविया की शिकायत पर रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ दूसरी FIR दर्ज की गई थी।

STF रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

STF की जांच में सामने आया है कि संस्थान के कई विभागों में धर्मांतरण के लिए दबाव डालने, महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने और शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसी गतिविधियां चल रही थीं। रिपोर्ट में पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभागों के साथ-साथ गांधी वार्ड में हुईं घटनाओं का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि जब पीड़ितों ने शिकायत करने की कोशिश की, तो उन्हें परीक्षाओं में फेल करने और करियर बर्बाद करने जैसी धमकियां दी गईं।

रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैरा कय्यूम जैसे वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों पर भी आरोप हैं। उन पर शिकायतों को दबाने, आरोपियों का पक्ष लेने और शिकायतकर्ताओं को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह, डॉ. सजीन पर कई महिला डॉक्टरों से प्रेम संबंध बनाकर उन पर धर्म बदलने का दबाव डालने का आरोप है, जिन्हें 9 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।

विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया और नई समिति का गठन

मामले पर KGMU के प्रवक्ता के.के. सिंह ने IANS को बताया कि विश्वविद्यालय ने इन मामलों में कार्रवाई की है। उन्होंने कहा, "दो मामले सामने आए है। एक रमीज से जुड़ा था और दूसरा नर्सिंग स्टाफ के एक सदस्य और एक बहुरूपिये से जुड़ा था... बाकी दो मामलों का पता हमने खुद लगाया। यूनिवर्सिटी ने इनका पर्दाफाश किया और हमारी पहल पर ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।"

अब राज्य सरकार के निर्देश के बाद, KGMU की कार्यकारी परिषद इस मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन करेगी। इस समिति में एक कुलपति, एक रजिस्ट्रार, SC और OBC वर्ग के एक-एक शिक्षक और कार्यकारी परिषद द्वारा नामित दो सदस्य शामिल होंगे।

अन्य विभागों में भी गड़बड़ियां

STF की रिपोर्ट में कई और लोगों के नाम भी सामने आए हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की संविदा कर्मचारी ज्योति राव ने शफात अली खान पर छेड़छाड़ और धर्मांतरण के लिए दबाव का आरोप लगाया था, लेकिन कार्रवाई के बजाय ज्योति की ही नौकरी समाप्त कर दी गई। रेडियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रिजवान पर भी महिला डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने का आरोप है। इसके अलावा, गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ नफीस और फुरकान पर भी महिला सहकर्मियों पर धर्म बदलकर निकाह करने का दबाव डालने के आरोप हैं। STF ने अपनी रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोस' नामक एक समूह का भी जिक्र किया है, जो कुछ पूर्व और वर्तमान मेडिकल छात्रों का नेटवर्क बताया जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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