केतन अग्रवाल हत्याकांड: मुख्य आरोपी सिया गोयल ने माँगी जमानत, अदालत में सुनवाई शुरू
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर रहीं सिया गोयल ने जमानत के लिए अर्जी दी है। शनिवार को पुणे की एक अदालत में हुई पहली सुनवाई…
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर रहीं सिया गोयल ने जमानत के लिए अर्जी दी है। शनिवार को पुणे की एक अदालत में हुई पहली सुनवाई में विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम अभियोजन पक्ष की ओर से पेश हुए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गोयल ने जमानत के साथ-साथ खुद को मामले से बरी करने के लिए भी एक अर्जी दाखिल की है।
यह मामला 26 वर्षीय रियल एस्टेट कंपनी के निदेशक केतन अग्रवाल की मौत से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, इसी साल 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले में उन्हें कथित तौर पर एक खाई में धकेल दिया गया था, जिससे उनकी जान चली गई। इस हत्याकांड में सिया गोयल, उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और एक तीसरे व्यक्ति रितेश हांगे को आरोपी बनाया गया है। शनिवार को तीनों आरोपी पुणे की येरवडा जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत को मामले से जुड़े विवरण और पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में वे अदालत के सामने हत्या की कथित साजिश और इसमें गोयल व चौधरी की भूमिका से जुड़े सबूत पेश करेंगे। वहीं, सिया गोयल के वकील नितिन भलेराव ने दावा किया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी सबूत अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिन्हें हासिल करने के लिए भी एक अर्जी दी गई है। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विपुल दुशिम के अगली सुनवाई में पेश होने की उम्मीद है।
मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है। इसी दिन अदालत सिया गोयल की जमानत और बरी करने की अर्जी पर भी सुनवाई करेगी। अदालत ने मामले के तीसरे आरोपी रितेश हांगे को भी अगली सुनवाई से पहले अपना वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर अदालत उनके लिए कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त करेगी।
इनपुट: IANS



