केरल वक्फ बोर्ड में बड़ा फेरबदल, मुस्लिम लीग के मायिन हाजी बने नए अध्यक्ष
केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग…
केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के प्रदेश उपाध्यक्ष एम.सी. मायिन हाजी को बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब के.एस. हम्सा की अध्यक्षता वाले पिछले बोर्ड का कार्यकाल साढ़े चार साल से अधिक बचा हुआ था और उसे भंग करने को लेकर कानूनी चुनौती केरल हाईकोर्ट में लंबित है।
मार्च में गठित नौ सदस्यीय पुराने बोर्ड को भंग करने के पीछे सरकार ने कई सदस्यों के योग्यता मानदंडों पर खरा न उतरने का तर्क दिया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भी उस बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगा दी थी, जिससे उसका कामकाज प्रभावित हो रहा था। अब इस पुनर्गठन के साथ, सरकार का लक्ष्य वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को सुचारू बनाना है, हालांकि इस कदम ने एक नया कानूनी और राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।
नए बोर्ड की संरचना और राजनीतिक समीकरण
नए बोर्ड में कई अहम बदलाव किए गए हैं जो राज्य के मुस्लिम संगठनों के बीच के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। अध्यक्ष बनाए गए मायिन हाजी मुस्लिम लीग के एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें वक्फ बोर्ड में काम करने का पिछला अनुभव भी है। उनकी नियुक्ति को मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व के साथ सरकार के तनाव को कम करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
बोर्ड में समस्ता ई.के. धड़े से हाल ही में निकाले गए मुस्तफाल फैजी को भी शामिल किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है। इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी को वक्फ बोर्ड में पहली बार प्रतिनिधित्व मिला है। हालांकि, कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व वाले ए.पी. सुन्नी धड़े को इस बार जगह नहीं दी गई है। विधायक कोटे से कुरुक्कोली मोइदीन बोर्ड का हिस्सा होंगे।
लंबित कानूनी चुनौती और भविष्य
इस पूरे पुनर्गठन का भविष्य केरल हाईकोर्ट के फैसले पर टिका है। पिछले बोर्ड के अध्यक्ष के.एस. हम्सा ने इसे भंग करने के सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई जारी है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले के कारण फिलहाल टाल दी गई है। इन कानूनी पहलुओं के चलते नए बोर्ड का कामकाज भी प्रभावित हो सकता है।
इनपुट: IANS



