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CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 18 साल पुराने मामले में फिर होगी जांच, केरल के गृह मंत्री ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 18 साल पुराने एक मामले में केरल सरकार ने फिर से विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला 2006 का है, जब ज्ञानेश…

CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 18 साल पुराने मामले में फिर होगी जांच, केरल के गृह मंत्री ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश
(फोटो: IANS)

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 18 साल पुराने एक मामले में केरल सरकार ने फिर से विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर तैनात थे। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने यह आदेश कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल द्वारा दायर एक याचिका के बाद रविवार को जारी किया।

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यह पूरा मामला एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन की आत्महत्या से जुड़ा है। लीसी बीन उस कंसोर्टियम के लिए काम करते थे, जो केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) के तहत एमसी रोड के उन्नयन का काम कर रहा था। नवंबर 2006 में केरल से लौटने के बाद उन्होंने कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी। खबरों के मुताबिक, उनके कथित सुसाइड नोट में उस समय के पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार का नाम था।

जांच के आदेश क्यों दिए गए?

इस मामले में 2006 में भी एक विजिलेंस जांच हुई थी, लेकिन याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाहरी दबाव के कारण वह जांच ठीक से नहीं हो सकी और पटरी से उतर गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर राज्य के गृह विभाग ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) से पिछली जांच से जुड़ी सभी फाइलें तलब की हैं। गृह मंत्री के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि बाहरी दखल के आरोप गंभीर हैं और इनकी विस्तृत जांच की जाएगी।

गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि वे हस्तक्षेप के आरोपों की पूरी पड़ताल करें और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। नई जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि शुरुआती जांच किन परिस्थितियों में की गई थी और उस समय लगाए गए आरोपों से कैसे निपटा गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

लीसी बीन की मौत को उस समय सड़क सुधार कार्यों के प्रशासन और क्रियान्वयन से जुड़ी कथित अनियमितताओं से जोड़कर देखा गया था। अब सरकार का यह नया कदम यह पता लगाने का प्रयास है कि क्या मूल कार्यवाही में कोई गड़बड़ी हुई थी। हालांकि, कथित सुसाइड नोट में कुमार के नाम का उल्लेख होना जांच का विषय है और यह किसी भी तरह से उनके किसी भी गलत काम में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। विजिलेंस जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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