केरल: राज्यपाल और ED पर सरकार के मंत्री का निशाना, PSC सदस्यों की बर्खास्तगी और जांच पर उठाए सवाल
केरल सरकार में मंत्री और आरएसपी नेता शिबू बेबी जॉन ने दो अहम मामलों पर अपनी ही सरकार के सत्ताधारी यूडीएफ खेमे से अलग रुख अपनाते हुए राज्यपाल और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए…
केरल सरकार में मंत्री और आरएसपी नेता शिबू बेबी जॉन ने दो अहम मामलों पर अपनी ही सरकार के सत्ताधारी यूडीएफ खेमे से अलग रुख अपनाते हुए राज्यपाल और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉन ने लोक सेवा आयोग (PSC) के सदस्यों को बर्खास्त करने की राज्यपाल की सिफारिश और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई के समय पर निशाना साधा है।
मंगलवार को दिए अपने बयान में उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी आरएसपी, राज्यपाल के कदम से सहमत नहीं है और ऐसे प्रयासों को संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश मानती है, जो स्वीकार्य नहीं है। उनकी यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सत्ताधारी यूडीएफ गठबंधन के भीतर से आई है, जो इन मुद्दों पर सरकार के रुख को और जटिल बनाती है।
राज्यपाल की सिफारिश पर सवाल
वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने सवाल उठाया कि राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए पीएससी के सभी सदस्यों की सामूहिक बर्खास्तगी की सिफारिश की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएससी एक संवैधानिक संस्था है, जो सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए जिम्मेदार है। जॉन के अनुसार, "मनमानी कार्रवाई के जरिए ऐसी संस्थाओं को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसपी इस मुद्दे पर राज्यपाल के रुख का समर्थन नहीं करती है।
ED की जांच में 'राजनीतिक मकसद'
पिनाराई विजयन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर भी मंत्री ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी की जांच अब महज एक "दिखावा" बनकर रह गई है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्रीय एजेंसियां इतने लंबे समय तक निष्क्रिय क्यों रहीं और पिछली पिनाराई सरकार के दौरान मामले को ठीक से आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया। शिबू बेबी जॉन ने कहा, "ED का अब नए सिरे से कदम उठाना संदिग्ध है... इसके पीछे स्पष्ट राजनीतिक मकसद है।"
सरकार का स्वतंत्र रुख
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार केंद्रीय एजेंसियों के निर्देशों पर आंख मूंदकर नहीं चलेगी। उन्होंने कहा, "जनता ने यूडीएफ सरकार को ईडी के निर्देशों के अनुसार कार्य करने के लिए नहीं चुना था।" जॉन ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को जांच एजेंसियों के राजनीतिक दांव-पेचों से प्रभावित होने के बजाय संवैधानिक सिद्धांतों और जनता की भावनाओं के आधार पर फैसले लेने होंगे।
इनपुट: IANS



