CMRL केस: पिनाराई विजयन को केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत, विजिलेंस जांच और FIR पर रोक
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास को सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में एक बड़ी राहत मिली है। केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सोमवार को उस आदेश पर रोक लगा दी है…
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास को सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में एक बड़ी राहत मिली है। केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सोमवार को उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें इन सभी के खिलाफ विजिलेंस जांच और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायमूर्ति के. एम. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने इस मामले में 9 अक्टूबर के एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को स्वीकार कर लिया। अदालत ने अगले आदेश तक FIR की जांच पर रोक लगाते हुए मामले की अंतिम सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला खनन कंपनी 'कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड' (सीएमआरएल) और मुख्यमंत्री की बेटी वीणा की कंपनी 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन लेन-देन से जुड़ी सामग्री राज्य पुलिस को सौंपी थी, जिसके बाद यह मामला अदालत पहुंचा। 9 अक्टूबर को उच्च न्यायालय के एक एकल न्यायाधीश ने राज्य सरकार के विशेष जांच दल (SIT) द्वारा प्रारंभिक जांच के फैसले को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो को मुख्यमंत्री विजयन, वीणा, रियास और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
यह घटनाक्रम 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हुआ है। शीर्ष अदालत ने जांच पर अंतरिम रोक लगाते हुए विजयन और अन्य को एकल न्यायाधीश के आदेश को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती देने की अनुमति दी थी।
अदालत में दी गईं दलीलें
सोमवार को सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने प्रभावित पक्षों को सुने बिना ही FIR का आदेश दे दिया। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (बीएनएसएस) की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला दिया। वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने ईडी से मिली सामग्री की जांच के लिए SIT का गठन किया था, लेकिन बाद में अदालत के निष्कर्षों को देखते हुए FIR दर्ज करने का निर्णय लिया। ED ने जांच पर रोक का विरोध करते हुए कहा कि जब किसी जानकारी से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो FIR दर्ज करना अनिवार्य होता है।
इनपुट: IANS



