केरल PSC भर्ती विवाद: हाईकोर्ट ने जांच पर उठाए गंभीर सवाल, सरकार और आयोग के रवैये पर की तीखी टिप्पणी
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की एक महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को एक सुनवाई के दौरान अदालत ने क्राइम ब्रांच की जांच की…
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की एक महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को एक सुनवाई के दौरान अदालत ने क्राइम ब्रांच की जांच की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए और पूछा कि चयन प्रक्रिया से जुड़े मुख्य व्यक्ति से पूछताछ किए बिना जांच आगे कैसे बढ़ सकती है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह तीखी टिप्पणी भी की कि अगर PSC और सरकार 'भाई-भाई' की तरह काम करेंगे तो लोगों को पूरी प्रक्रिया पर संदेह करने का कारण मिलेगा।
यह पूरा मामला राज्य योजना बोर्ड में उद्योग और बुनियादी ढांचा प्रभाग के प्रमुख पद पर भर्ती से जुड़ा है, जिसकी परीक्षा जुलाई 2023 में आयोजित की गई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब एक उम्मीदवार ने पाया कि उसकी उत्तर पुस्तिका में कई प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था।
क्या है पूरा विवाद?
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने पाया कि कुल 58 अंकों के 10 प्रश्नों का मूल्यांकन नहीं किया गया था, जिसका असर कई उम्मीदवारों के परिणामों पर पड़ा। शुरुआती चयन सूची में अरुण जे. प्रताप पहले स्थान पर थे और उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया था। लेकिन, तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार श्याम कृष्णन ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी।
इसके बाद हुए पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार ने पूरी मेरिट लिस्ट ही बदल दी। श्याम कृष्णन पहले स्थान पर आ गए, जबकि मूल टॉपर अरुण जे. प्रताप खिसककर पांचवें स्थान पर पहुँच गए।
PSC और सरकार का पक्ष
एक तरफ PSC लगातार यह दलील दे रहा है कि यह चूक केवल एक 'लिपिकीय गलती' थी और इसमें चयन प्रक्रिया में हेरफेर की कोई जानबूझकर कोशिश नहीं की गई। इसी आधार पर PSC ने अदालत से क्राइम ब्रांच की जांच को रद्द करने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि लागू नियम ऐसी जांच की अनुमति नहीं देते।
वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जांच जारी है, लेकिन PSC इसमें सहयोग नहीं कर रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो इस तरह की जांच को रोकता हो। क्राइम ब्रांच अब इस बात का पता लगा रही है कि यह सिर्फ एक अनजाने में हुई गलती थी या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।
इनपुट: IANS



