बेंगलुरु नकली दवा रैकेट: चेन्नई से एक और मुख्य आरोपी गिरफ्तार, SIT की हिरासत में अब तक 7 लोग
बेंगलुरु में करोड़ों रुपये के नकली दवा रैकेट की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, टीम ने चेन्नई से एक और मुख्य आरोपी बालासुब्रमण्यन को…
बेंगलुरु में करोड़ों रुपये के नकली दवा रैकेट की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, टीम ने चेन्नई से एक और मुख्य आरोपी बालासुब्रमण्यन को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या सात हो गई है।
बालासुब्रमण्यन की गिरफ्तारी इस मामले के मुख्य सरगना प्रशांत रंजन बाबू से हुई पूछताछ के बाद संभव हुई। प्रशांत को हाल ही में अजरबैजान से लौटने पर बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बुधवार को बताया कि पूछताछ के दौरान प्रशांत ने नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी दी थी, जिसके आधार पर चेन्नई में यह कार्रवाई की गई।
जांच और न्यायिक हिरासत
अदालत में पेश किए जाने के बाद बालासुब्रमण्यन को आगे की पूछताछ के लिए सात दिनों की SIT हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ताओं का मानना है कि चेन्नई स्थित फार्मा पार्टनर बालासुब्रमण्यन की नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में अहम भूमिका थी। वह फार्मास्युटिकल कंपनी 'डीएम फार्मा' में प्रशांत रंजन का पार्टनर था। SIT अब दोनों से पूछताछ कर इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
कैंसर की नकली दवाओं का बड़ा घोटाला
यह मामला तब सामने आया था जब बेंगलुरु में 5 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत की नकली, एक्सपायर हो चुकी और दोबारा लेबल लगाई गईं जीवन रक्षक दवाएं ज़ब्त की गई थीं। इनमें कैंसर और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल थीं। जांच में पता चला कि यह अवैध नेटवर्क 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों को इन दवाओं की आपूर्ति करता था।
इस घोटाले के सामने आने के बाद SIT ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कई जगहों पर छापेमारी की है। कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने इस मामले से जुड़े 16 दवा लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और आठ अन्य को निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग अब उन मरीज़ों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है, जिन तक ये नकली दवाएं पहुंची थीं, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जा सके।
इनपुट: IANS



