कर्नाटक में SC/ST आरक्षण वृद्धि रद्द: कांग्रेस और भाजपा में छिड़ा वाकयुद्ध, एक-दूसरे पर मढ़ा दोष
कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण वृद्धि को रद्द किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों ने इस…
कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण वृद्धि को रद्द किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों ने इस फैसले के लिए एक-दूसरे की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पिछली भाजपा सरकार पर बिना पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा के जल्दबाजी में यह फैसला लेने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्धारमैया ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि अदालत के इस फैसले से उन वंचित समुदायों की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है, जिन्हें पीढ़ियों से समान अवसर नहीं मिल सके। उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार को सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के फैसले की जानकारी थी, जिसमें कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने की बात कही गई थी।"
चुनावी लाभ बनाम सामाजिक न्याय
सिद्धारमैया ने सवाल उठाया कि जब कानूनी अड़चनों का पता था तो यह फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने कहा, "पर्याप्त संवैधानिक सुरक्षा दिए बिना इतनी जल्दबाजी में आरक्षण क्यों बढ़ाया गया? क्या सामाजिक न्याय से ज्यादा भाजपा के लिए चुनावी लाभ महत्वपूर्ण था?" गौरतलब है कि पिछली भाजपा सरकार ने 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एससी आरक्षण को 15% से बढ़ाकर 17% और एसटी आरक्षण को 3% से 7% कर दिया था।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने इस मामले को अदालत में लंबित बताकर बढ़े हुए आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के कर्नाटक के अनुरोध को खारिज कर दिया था। सिद्धारमैया ने कहा, "आरक्षण कोई दान नहीं है। यह ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने और समाज के वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का एक संवैधानिक माध्यम है।" उन्होंने केंद्र से 50% की सीमा से आगे बढ़कर जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग की।
भाजपा का पलटवार
दूसरी ओर, कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने वर्तमान कांग्रेस सरकार पर इस मामले में ठीक से पैरवी न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया सरकार अदालत में आरक्षण वृद्धि का बचाव करने में नाकाम रही, जिससे सामाजिक न्याय को झटका लगा है।
विजयेंद्र ने एक बयान में कहा, "जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने का निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की भाजपा सरकार ने लिया था... लेकिन मौजूदा कांग्रेस सरकार अदालत में इस बढ़े हुए आरक्षण की रक्षा नहीं कर सकी।" उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अनुसूचित समुदायों के कल्याण के लिए कभी भी दीर्घकालिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया। विजयेंद्र ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर लापरवाही जारी रखी तो भाजपा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
इनपुट: IANS



