मैसूर दशहरा विवाद: सुझावों को 'आदेश' समझने पर शाही परिवार ने जताई आपत्ति, सरकार बोली- बात करेंगे
मैसूर दशहरा समारोह के आयोजन को लेकर उठे विवाद पर पूर्व मैसूर शाही परिवार की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकार को भेजे गए उनके पत्र में केवल सुझाव…
मैसूर दशहरा समारोह के आयोजन को लेकर उठे विवाद पर पूर्व मैसूर शाही परिवार की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकार को भेजे गए उनके पत्र में केवल सुझाव थे, जिन्हें किसी भी तरह से निर्देश या आदेश नहीं समझा जाना चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका इरादा कर्नाटक सरकार को दोषी ठहराना नहीं था।
प्रमोदा देवी ने मैसूर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि उनके सुझावों का मकसद भविष्य में दशहरा उत्सव का आयोजन सुचारु और बिना किसी परेशानी के सुनिश्चित करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सुझावों को मानना या न मानना पूरी तरह से सरकार पर निर्भर है। उनकी मुख्य आपत्ति दशहरा के दौरान पुलिस की मौजूदगी और कुछ कर्मियों के व्यवहार को लेकर थी।
स्वर्ण हौदा और हाथियों का मुद्दा
उत्सव के मुख्य आकर्षण 'स्वर्ण हौदा' (गोल्डन हाउदाह) पर उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यह शाही परिवार की निजी संपत्ति है और किसी भी सरकारी कानून के दायरे में नहीं आता। उनके अनुसार, न तो स्वर्ण हौदा और न ही शाही सिंहासन सरकारी संपत्ति हैं। सरकार द्वारा इसके उपयोग के लिए किए जाने वाले भुगतान को 'रॉयल्टी' कहने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि सरकार जुलूस के लिए हौदे का उपयोग करने से पहले अनुमति मांगती है और उसी संदर्भ में यह भुगतान होता है।
प्रमोदा देवी ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वर्ण हौदा ले जाने वाले हाथी के चयन में महल प्रशासन को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह केवल शाही परिवार के अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि हाथी और लाखों लोगों की सुरक्षा का भी सवाल है।" उन्होंने पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि हाथी को अंतिम रूप देने से पहले महल से सलाह-मशविरा करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
सरकार और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस मसले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन वे प्रमोदा देवी की चिंताओं पर गौर करेंगे और उनसे बात भी करेंगे। उन्होंने कहा, "कर्नाटक का शाही परिवार हमारे लिए अत्यंत सम्मानित है।"
इससे पहले, मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा था कि मैसूर महल और उसका प्रशासन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार अंबारी (स्वर्ण हौदा) के उपयोग के लिए सभी आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन करती है। जब भाजपा नेताओं ने उनसे माफी की मांग की तो उन्होंने इनकार कर दिया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रमोदा देवी वाडियार ने एक पत्र जारी कर मैसूर दशहरा 2026 के आयोजन पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों और पुलिस के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें यह जानने के लिए कि कौन सा हाथी स्वर्ण हौदा उठाएगा, कार्यक्रम से पांच दिन पहले खुद वन विभाग से संपर्क करना पड़ा था।
इनपुट: IANS



