सिद्धारमैया 'स्टिंग' विवाद: JDS ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की चुप्पी पर उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े एक कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। जनता दल (सेक्युलर) ने इस मामले में राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की चुप्पी की कड़ी…
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े एक कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। जनता दल (सेक्युलर) ने इस मामले में राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की चुप्पी की कड़ी आलोचना करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जेडी-एस ने खड़गे पर निशाना साधते हुए पूछा है कि क्या उन्हें डर है कि जांच में सरकार से जुड़े लोगों और किसी बड़े राजनीतिक नेता की संलिप्तता सामने आ जाएगी।
जेडी-एस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बयान जारी कर प्रियांक खड़गे से कई तीखे सवाल पूछे। पार्टी ने कहा कि लोकतंत्र में संविधान सभी को सवाल पूछने और न्याय की आवाज उठाने का अधिकार देता है। उन्होंने खड़गे से पूछा कि क्या वे इस मुद्दे पर दूसरों को बोलने से रोककर खुद को तानाशाह समझ रहे हैं।
सरकार की मंशा पर सवाल
पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि सिद्धारमैया की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की इस कथित कोशिश के पीछे कौन है, यह कांग्रेस सरकार को जल्द से जल्द सार्वजनिक करना चाहिए। जेडी-एस ने खड़गे को याद दिलाया, "क्या आप भूल गए हैं कि सिद्धारमैया के प्रयासों से ही आपने चित्तपुर विधानसभा सीट जीती और मंत्री बने?" पार्टी ने उन्हें यह भी बताने की चुनौती दी कि सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने के प्रयास के पीछे क्या कारण थे।
पार्टी ने कहा कि यह स्टिंग ऑपरेशन विवाद अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है, ऐसे में राज्य के गृह मंत्री का चुप रहना कई सवाल खड़े करता है। जेडी-एस ने आरोप लगाया कि प्रियांक खड़गे ने सिद्धार्थ ट्रस्ट के लिए एक नागरिक सुविधा स्थल हासिल करने में तो तत्परता दिखाई, लेकिन जब सिद्धारमैया की प्रतिष्ठा पर हमला हुआ तो वह न्याय के लिए खड़े नहीं हुए।
पारदर्शिता की मांग
इससे पहले, जेडी-एस के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी इस मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद से ही कर्नाटक में यह राजनीतिक टकराव बढ़ता जा रहा है। पार्टी ने बुधवार को फिर पूछा कि सरकार इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने से क्यों हिचकिचा रही है।
इनपुट: IANS



