मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक 'गृह लक्ष्मी' योजना: अयोग्य लाभार्थियों को हटाने के लिए सरकार कराएगी दोबारा जांच

कर्नाटक सरकार अपनी महत्वाकांक्षी 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत दिए जा रहे लाभों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने योजना के सभी लाभार्थियों की दोबारा जांच कराने का…

कर्नाटक 'गृह लक्ष्मी' योजना: अयोग्य लाभार्थियों को हटाने के लिए सरकार कराएगी दोबारा जांच
(फोटो: IANS)

कर्नाटक सरकार अपनी महत्वाकांक्षी 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत दिए जा रहे लाभों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने योजना के सभी लाभार्थियों की दोबारा जांच कराने का फैसला किया है ताकि अयोग्य लोगों को सूची से हटाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ₹2,000 की मासिक आर्थिक सहायता केवल जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

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यह जांच प्रक्रिया महिला एवं बाल कल्याण विभाग के समन्वय में पूरी की जाएगी, जिसे इसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। गारंटी कमेटी के चेयरमैन एच.एम. रेवन्ना इस विषय पर सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे, जिसके बाद इस पर औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है।

जांच की प्रक्रिया कैसी होगी?

जिला और तालुक स्तर पर होने वाली इस जांच में स्थानीय गारंटी कमेटियों के सदस्य भी शामिल होंगे। सरकारी कर्मचारी एक विशेष ऐप का उपयोग कर लाभार्थियों के घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा और सत्यापित करेंगे। इस दौरान चेहरे की पहचान (फेस ऑथेंटिकेशन) और बायोमेट्रिक जांच जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में राजस्व निरीक्षक और बिल कलेक्टर भी अधिकारियों की मदद करेंगे।

इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जो अब पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। इसके तहत उन लोगों की भी पड़ताल होगी जो वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) या आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड की जांच कर उन लाभार्थियों का नाम भी हटाया जाएगा जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन उनके खाते में अभी भी सहायता राशि जा रही है।

योजना का उद्देश्य और मौजूदा स्थिति

अगस्त 2023 में शुरू हुई 'गृह लक्ष्मी' योजना कांग्रेस सरकार की पांच प्रमुख गारंटियों में से एक है। इसके तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने ₹2,000 दिए जाते हैं। सरकार का लक्ष्य इस दोबारा जांच के माध्यम से योजना में पारदर्शिता बढ़ाना और धन के किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोकना है।

वर्तमान में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 1.23 करोड़ तक पहुंच गई है। सरकार ने इसके लिए सालाना करीब ₹32,000 करोड़ का बजट रखा है और योजना की शुरुआत से अब तक कुल ₹74,000 करोड़ से ₹76,500 करोड़ के बीच खर्च कर चुकी है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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