शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक में पेट्रोल में तय सीमा से ज़्यादा एथेनॉल, सरकार ने केंद्र से की कार्रवाई की मांग

कर्नाटक सरकार ने केंद्र से मांग की है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बताना अनिवार्य किया जाए। यह कदम तब उठाया गया जब राज्य में कई जगहों से लिए गए पेट्रोल के नमूनों में…

कर्नाटक में पेट्रोल में तय सीमा से ज़्यादा एथेनॉल, सरकार ने केंद्र से की कार्रवाई की मांग
(फोटो: IANS)

कर्नाटक सरकार ने केंद्र से मांग की है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बताना अनिवार्य किया जाए। यह कदम तब उठाया गया जब राज्य में कई जगहों से लिए गए पेट्रोल के नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 20% की निर्धारित सीमा से कहीं ज़्यादा पाई गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने इस मामले में तेल कंपनियों पर कार्रवाई करने और उपभोक्ताओं को मुआवज़ा देने की भी मांग की है।

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शुक्रवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले मंत्री रिजवान अरशद ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देश पर 'मिशन निखारा' के तहत यह अभियान चलाया गया।

जांच में क्या मिला?

विधिक माप विज्ञान विभाग ने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से पेट्रोल के नमूने एकत्र किए थे। एनएबीएल मान्यता प्राप्त और आईएसओ प्रमाणित प्रयोगशालाओं में इन नमूनों की जांच की गई। रिपोर्ट के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए:

  • आईओसीएल पेट्रोल: 31.2% एथेनॉल
  • एचपीसीएल (एमजी-पावर): 30.5% एथेनॉल
  • एचपीसीएल (सामान्य): 27% एथेनॉल
  • बीपीसीएल (एमएस स्पीड): 26.5% एथेनॉल
  • नायरा पेट्रोल: 26.1% एथेनॉल
  • शेल पेट्रोल: 25.5% एथेनॉल

मंत्री अरशद ने तेल कंपनियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि शुरुआत में जब नमूने आईओसीएल और बीपीसीएल की आंतरिक प्रयोगशालाओं में भेजे गए, तो उनकी रिपोर्ट में एथेनॉल की मात्रा का उल्लेख ही नहीं था।

उपभोक्ताओं पर असर और मुआवज़े की मांग

रिजवान अरशद ने चेतावनी दी कि ज़्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल से वाहनों का माइलेज घट सकता है और फिल्टर, फ्यूल पंप, इंजेक्टर जैसे पुर्ज़ों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने दावा किया, "भारत में अनुमानित 35 करोड़ वाहनों में से करीब 99 प्रतिशत वाहन ई20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं।" उनके मुताबिक, अप्रैल 2023 के बाद बेचे गए वाहन भी केवल ई20 के लिए ही प्रमाणित हैं।

मंत्री ने अनुमान लगाया कि यदि माइलेज 10% भी कम होता है, तो उपभोक्ताओं पर सालाना 62,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, और वाहनों की मरम्मत का खर्च 39,000 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जिससे कुल आर्थिक बोझ 1.01 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और उपभोक्ताओं को हुए नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की है।

'मिशन निखारा' जारी रहेगा

मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण से विदेशी मुद्रा बचाने का तर्क देती है, लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि 'मिशन निखारा' के तहत पूरे कर्नाटक में ईंधन की गुणवत्ता और माप की जांच जारी रहेगी। राज्य सरकार मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन तथा अनियमितताओं की रोकथाम) आदेश, 2005 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई करेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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