बेंगलुरु: पत्नी की शिकायत ने खोला जेल का राज़, फर्ज़ी आदेश पर छूटा कैदी, DIG समेत 3 गिरफ्तार
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला की शिकायत के बाद जेल अधिकारियों द्वारा यौन शोषण और सुप्रीम कोर्ट के फर्ज़ी आदेश पर एक उम्रकैदी की रिहाई का बड़ा…
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला की शिकायत के बाद जेल अधिकारियों द्वारा यौन शोषण और सुप्रीम कोर्ट के फर्ज़ी आदेश पर एक उम्रकैदी की रिहाई का बड़ा खुलासा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस मामले में बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा पुलिस ने जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर नामक कैदी की पत्नी ने जेल विभाग में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, जेल से रिहा होने के बाद शंकर ने उसे कथित तौर पर छोड़ दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली। इसी धोखे से आहत होकर महिला ने अधिकारियों से संपर्क किया, जिससे जेल के भीतर चल रही एक बड़ी साजिश की परतें खुलने लगीं।
कैसे हुई फर्ज़ी रिहाई?
पुलिस जांच में पता चला है कि शंकर को 2004 में एक मामले में उम्रकैद की सज़ा हुई थी, जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। इसके बावजूद, उसे 13 नवंबर 2018 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। आरोप है कि जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की हूबहू नकली प्रति तैयार की थी, जिसे असली बताकर शंकर की रिहाई सुनिश्चित की गई।
यौन शोषण के गंभीर आरोप
पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि जब वह अपने पति से मिलने जेल जाती थी, तब वह जेल अधिकारियों के संपर्क में आई। आरोप है कि तत्कालीन चीफ सुपरिंटेंडेंट और वर्तमान डीआईजी सोमशेखर ने पति को छुड़ाने में मदद का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया। महिला का आरोप है कि सोमशेखर उसे वीडियो कॉल कर कपड़े उतारने के लिए कहते थे। पुलिस ने कथित वीडियो बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। एक अन्य आरोपी, जेल कर्मचारी श्रीकांत पर भी महिला के यौन शोषण का आरोप है।
अब तक की कार्रवाई
इस मामले की आधिकारिक जांच 20 मई को सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। पुलिस ने अब कैदी शंकर ए., जेल कर्मचारी श्रीकांत एस. और डीआईजी सोमशेखर को गिरफ्तार कर लिया है। शंकर और श्रीकांत को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि सोमशेखर से पूछताछ के लिए उन्हें 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में रखा गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह के फर्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल अन्य कैदियों को रिहा करने के लिए भी किया गया है।
इनपुट: IANS



