कर्नाटक: 38,000 करोड़ के बकाए पर ठेकेदारों की चेतावनी, 'नवंबर तक भुगतान नहीं तो भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ करेंगे जारी'
कर्नाटक में राज्य सरकार के साथ ठेकेदारों का विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने आरोप लगाया है कि आठ सरकारी विभागों पर उनका लगभग 38,000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। समाचार एजेंसी…
कर्नाटक में राज्य सरकार के साथ ठेकेदारों का विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने आरोप लगाया है कि आठ सरकारी विभागों पर उनका लगभग 38,000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार नवंबर तक उनके बिलों का भुगतान नहीं करती है, तो वे कथित कमीशनखोरी से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक कर देंगे।
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके फंड का इस्तेमाल कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जो ठेकेदार कमीशन दे रहे हैं, उनके बिलों को भुगतान में प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछली भाजपा सरकार की तुलना में अब ठेकेदारों से मांगे जाने वाले कमीशन की दर बढ़ गई है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
मंजूनाथ ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर अपना वादा पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिवकुमार ने पहले आश्वासन दिया था कि 30 जून तक सभी बकाया बिल चुका दिए जाएंगे, लेकिन सरकार इसमें विफल रही। मंजूनाथ के मुताबिक, विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस नेताओं ने ठेकेदारों की समस्याओं को समझा था। उन्होंने याद दिलाया कि जब संघ ने पिछली भाजपा सरकार के खिलाफ 40 प्रतिशत कमीशन के आरोपों को लेकर आंदोलन किया था, तब डी.के. शिवकुमार और पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने उनसे मुलाकात की थी।
उस समय इन नेताओं ने वादा किया था कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। मंजूनाथ ने कहा, "कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।" उन्होंने सरकार से आग्रह किया, "गारंटी योजनाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। सरकार को दूसरे स्रोतों से फंड का इंतजाम करना चाहिए और हमारा पैसा जारी करना चाहिए।"
वन विभाग में भी गड़बड़ी का दावा
ठेकेदारों के संघ ने कर्नाटक वन विभाग में काम सौंपने की प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। मंजूनाथ ने दावा किया कि विभाग के 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत अधिकारियों को सीधे सैकड़ों करोड़ रुपये के काम सौंप दिए गए। इन प्रावधानों में बिना टेंडर के काम आवंटित करने की व्यवस्था थी। उन्होंने कहा कि संघ के पास पिछले चार वर्षों के संबंधित दस्तावेज़ मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने हाल ही में इस प्रथा को रोक दिया है।
आंदोलन तेज़ करने की तैयारी
भुगतान में हो रही देरी के कारण पिछले चार-पांच वर्षों से लगभग 1.5 लाख ठेकेदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अब संघ ने जिला स्तर पर अपना आंदोलन तेज़ करने की योजना बनाई है। मंजूनाथ ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यमंत्री उनके साथ बैठक नहीं करते हैं, तो ठेकेदार उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालयों तक पदयात्रा करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली और मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ठेकेदारों का सहयोग कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



