कर्नाटक में सूखे का संकट गहराया, सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी से मांगी तत्काल 50% राहत राशि
कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, जिसके चलते मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल वित्तीय मदद की गुहार लगाई है। समाचार एजेंसी IANS के…
कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, जिसके चलते मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल वित्तीय मदद की गुहार लगाई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सीएम ने केंद्र से अनुरोध किया है कि राज्य द्वारा मांगी गई कुल सूखा राहत राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम सहायता के तौर पर फौरन जारी किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बताया कि राज्य में अब तक कुल 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 सीजन के अंत तक यह संख्या 200 के पार जा सकती है। लगातार कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी के कारण 40 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने का अनुमान है।
बढ़ती चिंता और राहत की मांग
शुरुआत में, राज्य सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 101 सूखा प्रभावित तालुकों में तत्काल राहत कार्यों हेतु ₹3,705.30 करोड़ की वित्तीय सहायता मांगी थी। हालांकि, स्थिति और बिगड़ने पर वैज्ञानिक आकलन के आधार पर अतिरिक्त 76 तालुकों को भी इस सूची में शामिल करना पड़ा। मुख्यमंत्री के अनुसार, नए घोषित सूखा प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जिसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के तहत मदद के लिए एक और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
पेयजल और खेती पर गहरा असर
डी.के. शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि जून से अगस्त के बीच होने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल खरीफ की खेती के लिए जरूरी है, बल्कि जलाशयों को भरने, पनबिजली उत्पादन, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद करती है। इस मानसून में बारिश की भारी कमी ने इन सभी क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। उन्होंने कावेरी बेसिन सहित अन्य जलाशयों में पानी के घटते स्तर पर भी चिंता व्यक्त की, जिससे आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल की किल्लत हो सकती है।
प्रक्रिया में देरी से बढ़ सकती है मुश्किल
मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम के कर्नाटक दौरे का प्रस्ताव है। हालांकि, उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि केंद्रीय टीम की रिपोर्ट और उस पर उच्च स्तरीय समिति द्वारा मंजूरी की पूरी प्रक्रिया काफी समय लेने वाली है, जबकि राज्य में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किए बिना, मांगी गई राशि का 50% हिस्सा तुरंत जारी करने का आग्रह किया है, ताकि फसल नुकसान पर सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति और पशुधन की सुरक्षा जैसे राहत कार्य फौरन शुरू किए जा सकें। इसके अलावा, उन्होंने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की दूसरी किस्त भी अग्रिम रूप से जारी करने का अनुरोध किया है।
इनपुट: IANS



