कर्नाटक: गन्ना किसानों के आंदोलन से पेराई रुकी, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पीएम मोदी से मांगी मदद
उत्तरी कर्नाटक में गन्ना किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे गन्ने की पेराई का महत्वपूर्ण मौसम शुरू नहीं हो पा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कर्नाटक के…
उत्तरी कर्नाटक में गन्ना किसान अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे गन्ने की पेराई का महत्वपूर्ण मौसम शुरू नहीं हो पा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, शिवकुमार ने अपने पत्र में कहा है कि किसानों की मुख्य मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में हैं, और जब तक वहां से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं हैं।
सोमवार को लिखे गए तीन पन्नों के पत्र में मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनों के कारण खेतों में पकी हुई फसल खड़ी है और हर दिन की देरी से गन्ने के वजन और चीनी की मात्रा में भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, लगातार हो रहे सड़क जाम से आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है। किसान अपनी मांगों को लेकर कई शहरों से हुबली की ओर पदयात्रा निकाल रहे हैं, जिसका मकसद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास का घेराव करना है। हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस प्रस्तावित घेराव पर रोक लगा दी है।
किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र से पांच प्रमुख मांगों पर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है। इन मांगों में शामिल हैं:
- चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में संशोधन किया जाए।
- घरेलू और व्यावसायिक उपयोग की चीनी के लिए अलग-अलग कीमतें तय हों।
- गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद और मूल्य निर्धारण की नीति में बदलाव हो।
- गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने के लिए आधार वसूली दर को पहले की तरह 9.50 प्रतिशत पर बहाल किया जाए।
राज्य सरकार के प्रयास और सीमाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर जाकर किसानों से पदयात्रा खत्म करने की अपील भी की थी। सरकार ने एक आदेश के जरिए मिलों द्वारा तय कीमत के अलावा 100 रुपए प्रति टन अतिरिक्त भुगतान सुनिश्चित किया, जिसमें से 50 रुपए प्रति टन (लगभग 290 करोड़ रुपए) सीधे राज्य के खजाने से किसानों को दिए गए।
इसके अलावा, चीनी मिलों के तौल-कांटों में गड़बड़ी रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई और सभी 81 मिलों को एनालॉग से डिजिटल लोड सेल पर अपग्रेड किया गया। इन कदमों से चीनी की औसत रिकवरी दर 2022-23 में 9.91% से बढ़कर 2025-26 में 11.09% हो गई। हालांकि, शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्य मांगों पर फैसला लेना सिर्फ केंद्र के हाथ में है।
इनपुट: IANS



