SC/ST आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी कर्नाटक सरकार? कैबिनेट बैठक में होगा अंतिम निर्णय
कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर 56% करने के पिछली सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अब राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम…
कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण की सीमा 50% से बढ़ाकर 56% करने के पिछली सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अब राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है, जिस पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह जानकारी उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में दी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने सामने मौजूद कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी और आगे की कार्रवाई तय करने के लिए कैबिनेट में चर्चा करेगी। उन्होंने कहा, "जैसा कि मैंने कहा, मंत्रिमंडल फैसला लेगा। हमें अपील करनी चाहिए या नहीं, इसका निर्णय संवैधानिक ढांचे के भीतर ही लिया जाना चाहिए।"
आरक्षण बढ़ाने का आधार और उद्देश्य
जी. परमेश्वर ने बताया कि पिछली सरकार ने SC कोटा 15% से बढ़ाकर 17% और ST कोटा 3% से बढ़ाकर 7% कर दिया था, जिससे कुल आरक्षण 56% हो गया था। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना था। उन्होंने जोर दिया, "बाबासाहेब अंबेडकर ने आरक्षण का प्रस्ताव क्यों रखा? ...इसका उद्देश्य उन लोगों को न्याय दिलाना था जिन्हें हजारों वर्षों से अवसरों से वंचित रखा गया था।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार ने भी सत्ता में आने के बाद इस बढ़े हुए आरक्षण का समर्थन किया था और कई भर्तियों व अन्य प्रक्रियाओं में इसे लागू भी किया गया।
फैसले का प्रभाव और भविष्य की राह
उपमुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी निजी राय भी व्यक्त की। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण दिया, जहां संवैधानिक संशोधन के तहत 69% आरक्षण लागू है। परमेश्वर ने कहा, "मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हमारे राज्य में आरक्षण में मात्र छह प्रतिशत अंकों की वृद्धि को भी परिस्थितियों के आधार पर एक विशेष मामले के रूप में माना जा सकता था। यह मेरी निजी राय है, और मुझे लगता है कि यह निर्णय उचित नहीं है।"
सरकार अब इस बात की भी जांच करेगी कि इस आदेश का छात्रों और नौकरी के उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ेगा और यह फैसला पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा या भविष्य में।
इनपुट: IANS



